अम्बेडकरनगर: भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा 800 करोड़ की लागत का एनएच-233

द ब्लाट न्यूज़ कलवारी-टांडा-अतरौलिया-आजमगढ़ एनएच 233 खस्ताहाल, 4 महीने बाद होगा हैंडओवर!

सड़क और ठेकेदार इनका चोली-दामन का साथ है। यदि कोई राष्ट्रीय राजमार्ग हो और उसका निर्माण करना हो, तब क्या पूछना ? ऐसे में ठेकेदार यानि कार्यदायी संस्था की दसों घी में और सिर कड़ाही में। ठेकेदार, संबंधित अधिकारी व कर्मचारी मालामाल।

 

 

सड़क बदहाल व खस्ताहाल। यहां जिक्र हो रहा है, 800 करोड़ रुपए से निर्मित एनएच 233 की दुर्दशा और दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड कार्यदायी संस्था की कहानी का। इस समय अंबेडकरनगर जिले में टांडा से अतरौलिया के लिए 800 करोड़ की लागत से निर्माण हो चुके एनएच – 233 का दुर्दशाग्रस्त हाल देखने से ही पता चल जाता है कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा यह राष्ट्रीय राजमार्ग जल्द ही दम तोड़ देगा।

हालांकि, इसके निर्माणकर्ताओं दिलीप बिल्डकॉन द्वारा यह दावा किया गया है कि इस एनएच की उम्र 25 वर्ष है, परंतु इसे देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि यह ठेकेदार द्वारा घोषित उम्र को स्पर्श कर पाएगी। एनएच-233 , जिसका निर्माण दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड द्वारा किया गया है। निर्माणदायी संस्था और संबंधित अधिकारियों ने जमकर पैसों की लूट की है।

निर्माण कार्य में मानक का ध्यान ही नहीं रखा गया है। यही नहीं, भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड का भुगतान भी किया जा चुका है। एनएच – 233 का औपचारिक हैंडओवर होना बाकी है। निर्माण संबंधी जानकारों के अनुसार, दिलीप बिल्डकाॅन लिमिटेड द्वारा निर्मित एनएच – 233 कलवारी टांडा से अतरौलिया आजमगढ़ सड़क अल्प आयु होगी, क्योंकि, इसमें मानक को दरकिनार किया गया है।

25 वर्ष तक कौन कहे, यदि इसकी वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाए, तो पांच वर्ष भी नहीं पूरा कर सकती। पच्चीस वर्ष तो बहुत दूर की बात है। कम समय में उक्त एनएच-233 की स्थिति बद से बदतर हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार, उक्त सड़क को आगामी अप्रैल-मई में निर्माणदायी संस्था द्वारा पूर्ण रुप से निर्मित करना है।

भ्रष्टाचार के सागर में डुबकी लगाकर करोड़ो रुपए अपनी तिजोरियों मेंभरने वाले निर्माणदायी संस्था और सरकारी अधिकारी व विभागीय कर्मचारी जल्द ही मुक्ति पाना चाहते है। यदि, अभी उक्त सड़क एनएच-233 को देखा जाए तो वह दुर्दशाग्रस्त हो चुकी है और अपनी करुण कहानी लोगों से बयां कर रही है।

प्रश्न उठता है, क्या निर्माणदायी संस्था एनएच-233 को हैंडओवर कर पाएगी या नहीं? शुरुआती दौर में ही दुर्दशाग्रस्त सड़क की क्षतिपूर्ति इस संस्था से करा पाएगी या नही? यह अपने आप में सोचनीय है।

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