पाक का ड्रोन से हमला: ईंट का जवाब पत्थर से जरूरी…..!

-ओमप्रकाश मेहता-

पाकिस्तान की या तो स्मरण शक्ति कमजोर हो गई है या चीन का प्रश्रय पाकर वह अपनी औकात भूल चुका है, तभी उसने भारत से आपसी तकरार में पहली बार ड्रोन से हमले की तकनीक को अपनाया है और हमारे जम्मू-कश्मीर एयर फोर्स स्टेशन को क्षति पहुंचाने की नाकाम कोशिश की। पाकिस्तान इस हमले के द्वारा वायुसेना के विमानों को नष्ट करना चाहता था और इसीलिए उसने आधी रात को यह कायराना हमला किया उसे पता है कि ड्रोन सुरक्षा उपकरण रेडॉर में नहीं आते, बस इसी का उसने फायदा उठाने की कोशिश की और पहली बार ड्रोन के माध्यम से दो-दो किलो के विस्फोटक एयर फोर्स स्टेशन के परिसर में डाले, जिसमें हमारे दो जवान घायल अवश्य हुए, किंतु हमारी सेना के विमानों को कोई क्षति नहीं पहुंची, दु:ख तो इस बात का है कि ड्रोन यह विस्फोटक डालकर वापस लौट गए।

यद्यपि फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम की भारत की शीर्ष जांच एजेंसियां जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ये ड्रोन पाकिस्तान के ही थे? पर चूंकि घटना स्थल से भारत-पाक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा सिर्फ चौदह किलोमीटर की ही दूरी पर है, इसलिए आशंका के दायरे में सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान ही है। यह तय हो जाने के बाद कि यह करतूत पाकिस्तान की है, उसके बाद इस हमले की मूंह तोड जवाब देने की भारत तैयारी करेगा, हो सकता है दो साल पहले जिस तरह पुलवामा में हुए हमले का भारत ने जवाब दिया था, उसी तर्ज पर जवाब दिया जाए?

जब ड्रोन को हमले का हथियार बनाया गया है तो यह बताना भी जरूरी है कि दो सालों में भारतीय सीमा में करीब 244 ड्रोन पाकिस्तान से आए इनमें से कई को भारतीय सेना ने मार गिराया और कई वापस भाग भी गए किंतु ड्रोन से हमले की यह पहली घटना है, इससे पहले हवाई हमलों के लिए पाक ने ड्रोन का उपयोग कभी नहीं किया। उल्लेखनीय है कि पिछले साल ही पाकिस्तान ने चीन से खरीदे थे, ये ड्रोन बीस से पच्चीस किलोमीटर तक की उड़ान भरकर हमले करने की क्षमता रखते है, पिछले साल हमारे सुरक्षा बलों ने कश्मीर में पाक का ऐसा ही एक ड्रोन मार गिराया था। ड्रोन की मुख्य विशेषता यही है कि ये रेडॉर को चकमा देकर सीमा में प्रवेश कर सकते है जबकि विमान व हैलीकाप्टर रडॉर पर नजर आ जाते है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ड्रोन से हमलों की तकनीक भी पाक ने अपने पड़ौसी मुस्लिम देशों से ही सीखी है, क्योंकि पिछले दो सालों में ड्रोन के माध्यम से दुनिया में दो बड़ें हमले हुए है, पहला 14 सितम्बर 2019 को यमन में उग्रवादियों ने सऊदी अरब का ऑयल प्लांट उड़ाया था और उसके बाद 2 सितम्बर 2020 को अजरबैजान, आर्मीनिया में पहली बार दो देशों के युद्ध में ड्रोन का उपयोग किया गया था, इन्ही घटनाओं से पाक ने प्रेरणा लेकर अपने ड्रोन का भारतीय वायु सेना के स्टेशन पर हमला करने की नाकाम कोशिश की।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि भारत में अनेक स्थानों पर ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है, जिनमें मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता, चैन्नई जैसे महानगरों के साथ सेना व सुरक्षा बलों के अनेक प्रमुख स्थान शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी द्वारा हाल ही में जम्मू-कश्मीर को लेकर उठाए गए वार्ताकारी कदमों से पाक काफी बौखला गया है, अब जम्मू कश्मीर के बाद प्रधानमंत्री जी एक-दो दिन में ही लद्दाख के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से चर्चा करने वाले है यह पाकिस्तान को रास नहीं आ रहा है और उसने इसी बौखलाहट में यह आत्मघाती कदम उठाया है।
अब भारत के सभी नागरिकों को सुरक्षा एजेंसियों की जांच के नतीजों व उसके बाद भारत द्वारा पाक के खिलाफ उठाए जाने वाले सख्त कदम का इंतजार है, फिलहाल भारत के कई क्षेत्रों से राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों द्वारा इस कायराना करतूत के लिए पाक को पुलवामा हमले जैसा ही जवाब देने की सरकार से अपेक्षा की जा रही है, जिससे कि वह अपनी इस तरह की करतूत को दोहरा न सके।

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