गलत खानपान से कमजोर हो सकती है याददाश्त,

कई लोगों की याददाश्त कमजोर हो जाती है, जिसके कारण वह अपनी चीजों को भूलने लगते हैं। ऐसे में एक सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है। तो बता दें कि याददाश्त कमजोर होने का संबंध आपके खानपान से हो सकता है। डाइट में विटामिन की कमी से याददाश्त कमजोर होने लगती है।

ऐसे में अगर आप भी चीजों के बारे में भूलने लगे हैं और आपको लगता है कि आपकी याददाश्त कमजोर हो रही है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि भूलने की बीमारी को दूर भगाने के लिए किस तरह की डाइट लेनी चाहिए और विटामिन की याददाश्त से क्या संबंध है।

पौष्टिक आहार

स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी होता है। इसलिए डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि विटामिन और मिनरल्स से भरपूर फूड्स को डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर आपको कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी होने पर इसका असर आपकी याददाश्त पर भी पड़ता है।

न होने दें विटामिन की कमी

बता दें कि शरीर में विटामिन की कमी होने पर कमजोरी, चक्कर आना, थकान, एनर्जी लो होना और नजर का कमजोर होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक शरीर में विटामिन की कमी होने पर इसका मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर देखने को मिलता है।

विटामिन डी और बी12 की कमी का असर न सिर्फ व्यक्ति के शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलता है। इन दोनों विटामिन की कमी होने पर याददाश्त का कमजोर होना, एकाग्रता में कमी, तनाव, चिड़चिड़ापन आदि बढ़ने लगता है।

विटामिन बी12 की कमी

शरीर में विटामिन बी 12 की कमी होने पर डीएनए, लाल रक्त कोशिकाओं और न्यूरोट्रांसमीटर फंक्शन के उत्पादन के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर संतुलन में कमी, चलने में समस्या, थकान, एनीमिया, हाथ-पैरों का सुन्न होना, जीभ में सूजन और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्या हो सकती है।

विटामिन बी12 की कमी को पूरा करने के लिए मछली, चिकन, दूध, दही जैसे जैसे मिल्क प्रोडक्ट्स को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। आप चाहें तो डॉक्टर की सलाह पर विटामिन बी12 सप्लीमेंट या बी12 युक्त मल्टीविटामिन का भी सेवन कर सकते हैं।

विटामिन डी की कमी

हड्डियों को मजबूत बनाने में विटामिन डी का अहम रोल होता है। शरीर में इस विटामिन की कमी से हड्डियों में दर्द, बालों का झड़ना, मूड स्विंग, डिप्रेशन, थकान, घाव का धीमी गति से भरना और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्या हो सकती है। विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों और तंत्रिका प्रणाली को सुचारू रूप से कार्य करने में सहायक होता है।

यदि लंबे समय तक शरीर में इस विटामिन की कमी होती है, तो इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। वहीं शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर उंगलियों में झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है। वहीं इसकी कमी होने पर हृदय गति अनियमित हो सकती है।

विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आप अपनी डाइट में दूध और दूध से बनी चीजें, रागी, बाजरा, मछली, अंडे, तिल, हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें आदि को शामिल कर सकते हैं। साथ ही सुबह के समय कुछ देर के लिए धूप जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि सूर्य की रोशनी विटामिन डी का अच्छा स्त्रोत होता है।

फोलिक एसिड की कमी

फोलिक एसिड को फोलेट भी कहा जाता है। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए यह एक जरूरी विटामिन बी है। यह न सिर्फ मां बल्कि गर्भ में पलने वाले बच्चे के स्वास्थ्य के लिए भी काफी जरूरी है। क्योंकि फोलेट की कमी के कारण बच्चों में कोशिका बनने में कमी, बड़ी लाल रक्त कोशिकाएं और न्यूरल ट्यूब दोष जैसे समस्या हो सकती है। वहीं इसकी कमी से चिड़चिड़ापन, थकान, खराब शारीरिक और मानसिक विकास और दस्त आदि के लक्षण दिखने लगते हैं। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह के हिसाब से आप फोलिक सप्लीमेंट का सेवन कर सकती हैं।

आयरन की कमी

लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन के लिए आयरन बेहद अहम माना जाता है। शरीर में आयरन की कमी होने पर लाल रक्त कोशिकाओं में कमी आती है। जिसके कारण व्यक्ति को एनीमिया जैसी बीमारी हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिलाओं, हैवी पीरियड्स और शाकाहारी भोजन करने वाले लोगों में आयरन की कमी की आशंका अधिक होती है। वहीं इसकी कमी से एनीमिया हो सकता है। एनीमिया के कारण थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, सिरदर्द, ठंडे हाथ-पैर, सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कन तेज होना, सूजन, नाखूनों का टूटना, याददाश्त कमजोर होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हालांकि शुरूआती दौर में यह लक्षण कम हो सकते हैं। लेकिन शरीर में जैसे-जैसे आयरन की कमी होने लगती है, तब यह लक्षण अधिक नजर आने लगते हैं। शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए रागी, बाजरा और गेंहू से बने प्रोडक्ट को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसके अलावा आप चना दाल, हरी पत्तेदार सब्जियों और राजमा आदि को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

मैग्नीशियम की कमी

हड्डियों के स्वास्थ्य और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए मैग्नीशियम बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर थकान, कमजोरी, मानसिक सुन्नता, भूख न लगना, मतली, शरीर में झुनझुनी, मांसपेशियों में ऐंठन, दौरे और अनियमित हार्ट रेट आदि समस्याएं हो सकती हैं।

बता दें कि शरीर में मैग्नीशियम के लेवल को सामान्य रखने के लिए आप अपनी डाइट में मूंगफली, पालक, काली बीन्स, बादाम, काजू, डार्क चॉकलेट, मछली और साबूत अनाज जैसे मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं।

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