इंदौर: वेतनमान भुगतान में लापरवाही पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी

द ब्लाट न्यूज़ हाई कोर्ट इंदौर ने छोटे कर्मचारियों का वेतनमान भुगतान में लापरवाही पर नर्मदा घाटी परियोजना (एनवीडीए) इंदौर के कार्यपालन यंत्री सुनीलकुमार घाने का वेतन रोकने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की कि जिन अधिकारियों की अपने निचले व गरीब वर्ग के कर्मचारियों का दर्द नहीं दिखता, उनका वेतन रोका जाना चाहिए।

 

 

हाई कोट्र इंदौर में न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने नर्मदा घाटी परियोजना के चतुर्थ श्रेणी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ओमप्रकाश एवं नाथूसिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका कीसुनवाई करते हुए उक्त तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने एनवीडीए के वाइस चेयरमेन एसएम मिश्रा व एनवीडए की उप सचिव वर्षा सोलंकी (भोपाल) को 18 मई को हाई कोर्ट इंदौर में उपस्थित होने और स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए। कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है कि तीन वर्ष से दायर अवमानना याचिका चलने के बाद भी याचिकाकर्ता समेत 69 कर्मचारियों को पांचवें छठे वेतनमान का एरियर सहित भुगतान क्यों नहीं किया गया।

कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि वर्ष 2020 से विचाराधीन याचिका का जवाब तक पेश नहीं किया। सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी हार चुकी है। इसके बावजूद कर्मचारियों का वेतन आज तक भुगतान नहीं किया। केवल इसलिए कि ये कर्मचारी छोटे और गरीब वर्ग के हैं। ये कर्मचारी 30 वर्ष से अधिक समय से अधिकारियों की दया पर काम कर रहे हैं। यह अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि ऐसे अफसरों का वेतन रोका जाए जो छोटे कर्मचारियेां के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार करते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि उक्त अधिकारी 18 मई को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दे। कोर्ट ने ताजा सुनवाई में उपस्थित कार्यपालन यंत्री सुनीकुमार घाने का वेतन रोकने के आदेश दिए।

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