बिहार में बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए मनेगा प्रवेशोत्सव

 

पटना । बिहार में कोरोना महामारी के बाद एक मार्च से पहली से पांचवीं तक के स्कूल खुलने वाले हैं। इस बीच, सरकार ने स्कूलों में छात्रों के नामांकन के लिए प्रवेशोत्सव अभियान चलाने की योजना बनाई है। इस अभियान में वर्ग एक से नौवीं कक्षा तक में नामांकन के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।
अभियान का लक्ष्य है कि राज्य में ऐसा कोई भी बच्चा न हो, जो स्कूल से बाहर रह जाए। इस अभियान में शिक्षा विभाग के अलावा, ग्रामीण विकास विभाग और समाज कल्याण विभाग को लगाया गया है।

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण पिछले वर्ष से स्कूल लगातार बंद हैं। इस कारण बच्चों का सीखना और उनकी पढ़ाई बाधित हुई है। उक्त कमी को दूर करने एवं बच्चों को उम्र तथा कक्षा के अनुरूप दक्षता प्रदान कराने के लिए शैक्षणिक सत्र 2020-21 के सभी वर्गो में पूर्ववर्ती वर्गो के शैक्षिक सामग्री को छोटाकर तीन महीने का कैचअप कोर्स अप्रैल के पहले सप्ताह में चलाने का निर्णय लिया गया है।

कैचअप कोर्स प्रारंभ करने के लिए जरूरी है कि पूर्व में नामांकित छात्रों के साथ-साथ सभी अनामांकित एवं स्कूल से बाहर रहने वाले छात्र स्कूल पहुंच सकें।

शिक्षा विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस साल वर्ग एक से आठ और नौवीं कक्षा के अनामांकित बच्चों के नामांकन के लिए आठ मार्च से 20 मार्च के बीच प्रवेशोत्सव-विशेष नामांकन अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव जबकि समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को संयुक्त रूप से निर्देश जारी किया है।

उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत सभी स्कूलों को सजाया संवारा जाएगा तथा अभिभावकों का स्वागत और मान-सम्मान किया जाएगा। आठ मार्च को स्कूल प्रभातफेरी निकालेंगे तथा 10 मार्च से नामांकन का कार्य प्रारंभ हेागा।

अधिकारी कहते हें कि इस अभियान को शत प्रतिशत सफलता के लिए सामुदायिक सहयोग लिया जाएगा। अभिभावकों को जागरूक करने के लिए प्रभात फेरी के अलावा कला जत्थे गांव-गांव पहुंचेंगे और सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान की मानिटरिंग भी कराई जाएगी। इस अभियान के लिए जिलों को लक्ष्य भी तय किया गया है।

इस अभियान में प्रधानाध्यापक शिक्षा सेवक, आंगनबाड़ी सेविका एवं जीविका समूह का समन्वय भी सुनिश्चित करेंगे। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की जाएगी।