• January 26, 2021

मोदी बोले- कृषि से जुड़ी चीजों की सारी दीवारें हटा रहे हैं

 मोदी बोले- कृषि से जुड़ी चीजों की सारी दीवारें हटा रहे हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) की 93वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) और वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन किया. यह संबोधन डिजिटल माध्यम से हो रहा है. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साल 2020 ट्ववेंटी-ट्वेंटी के मैच में हमनें कई बार स्थितियों को बहुत तेजी से बदलते हुए देखा है. लेकिन साल 2020 सबको पीछे छोड़ गया. हमारे देश और पूरी दुनिया ने इस साल उथल-पुथल देखा. पीएम ने कहा कि अच्छी बात ये है कि कोरोना की वजह से स्थितियां जितनी जल्दी बिगड़ी उतनी ही तेजी से सुधर रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधारों की चर्चा करते हुए कहा कि नए कृषि सुधारों से किसानों को फायदा होने वाला है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि से जुड़े सारी चीजों से दीवारें हटा रहे हैं. नए कृषि कानून से किसानों को नए बाजार मिलेंगे. नए कृषि कानूनों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी. पीएम मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र में निवेश से किसानों को बहुत फायदा होगा, उन्हें नए विकल्प मिलेंगे, नए बाजार मिलेंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा कि महामारी के समय भारत ने नागरिकों के जीवन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान भारत ने जो फैसले लिए उससे पूरी दुनिया चकित है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने FICCI के 93वें वार्षिक वर्चुअल एक्सपो का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि साल 2020 ने सभी को मात दे दिया. लेकिन अच्छी बात ये है कि जितनी तेजी से हालात बिगड़े उतनी ही तेजी से सुधर भी रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी FICCI के इस संबोधन में कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन पर भी अपनी राय रख सकते हैं. इससे पहले पीएम मोदी ने कृषि कानूनों की जोरदार पैरवी की है. 30 नवंबर को पीएम मोदी ने कहा था कि नए कृषि सुधारों से किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और छल से, धोखे से कानूनी संरक्षण भी मिला है.

पीएम ने तब कहा था कि अगर किसान को कोई ऐसा खरीदार मिल जाए, जो सीधा खेत से उपज उठाए, जो ट्रांसपोर्ट से लेकर लॉजिस्टिक्स का हर प्रबंध करे और बेहतर कीमत दे, तो क्या किसानों को इसकी आजादी नहीं मिलनी चाहिए?

उन्होंने कहा था कि पहले सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था. लेकिन बीते कुछ समय से विरोध का आधार आशंकाओं को बनाया जा रहा है. जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर भ्रम फैलाया जाता है. कृषि कानून में भी यही हो रहा है.


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