• January 28, 2021

उच्च जोखिम बीमारियों से पीडिघ्त मरीज को मिला नया जीवन

 उच्च जोखिम बीमारियों से पीडिघ्त मरीज को मिला नया जीवन

लखनऊ । यंग स्ट्रोक के एक मामले में यूपी के मुजफ्फरनगर से 40 वर्षीय व्यक्ति एक्यूट स्ट्रोक (सेरेब्रल हेमरेज) का शिकार हो गया, भर्ती करने के बाद पता चला कि वह गंभीर कोविड निमोनिया से पीडित है। धूम्रपान का शौकीन इस मरीज को पहले से डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां हैं। मरीज सिर में दर्द, चक्कर आना, कमजोरी कर रहा था, पिछले 24 घण्टे से उसे बोलने में परेशानी हो रही थी और धुंधला दिखाई दे रहा था। एब्रप्ट वर्टिगो के साथ हालत बिगडने के बाद, उसे उल्टी हुई और मरीज को इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स के एमरजेन्सी विभाग में लाया गया। भर्ती करने पर पता चला कि मरीज को एक्यूट स्ट्रोक सेरेब्रल हेमरेज हुआ था। ऐहतियात के तौर पर कोविड-19 टेस्ट करने पर मरीज को पॉजिटिव पाया गया, यह गंभीर कोविड निमोनिया का मामला था। डा  विनीत सूरी, सीनियर कन्सलटेन्ट, न्यूरोलोजी, इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स के नेतृत्व में टीम ने सफलतापूर्वक मरीज का इलाज किया। डॉ विनीत सूरी, सीनियर कन्सलटेन्ट, न्यूरोलोजी, इन्द्रप्रस्थ अपोलो होस्पिटल्स ने कहा जब मरीज को एमरजेन्सी में लाया गया तो यह यंग स्ट्रोक का मामला था (युवा मरीज अगर स्ट्रोक का शिकार हो जाएं तो इसे यंग स्ट्रोक कहा जाता है)दिमाग की रक्तवाहिकाएं फटने के कारण उसके दिमाग में इंटरनल ब्लीडिंग हो रही थी। ऐसा तब होता है जब रक्तवाहिकाएं कमजोर हो जाएं और रक्त के दबाव को सहन न कर सकें। यह बेहद जोखिम वाला मामला था, क्योंकि मरीज की कोविड जांच भी पॉजिटिव आई और वह गंभीर कोविड निमोनिया से पीडिघ्त था, जिसके चलते उसे सांस फूलना, छाती में दर्द, बोलने तथा चलने-फिरने में भी परेशानी हो रही थी। मरीज की स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी, समय पर इलाज कर मरीज की जान बचाई जा सकी। एमरजेन्सी में भर्ती करते ही मरीज को लाईफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया। गंभीर स्ट्रोक और कोविड निमोनिया के चलते टीम ने तुरंत काम किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों बीमारियों के इलाज के लिए बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया। समय पर इलाज के साथ एक सप्ताह के अंदर स्ट्रोक और कोविड-19 के लक्षणों को स्टेबल किया गयातुरंत सही इलाज मिलने के कारण मरीज 4 सप्ताह में ठीक होने लगा और और उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। विशेषज्ञ हमेशा से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि कोविड-19 के डर से अपने इलाज में देरी न करें, किसी भी जोखिम के मामले में इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। जैसा कि इस मामले में हुआ, थोड़ी सी भी देरी मरीज के लिए घातक हो सकती थी।


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