नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के उपचार के लिए प्रयोग में लायी जा रही रेमडेसिविर दवा पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस एसए बोब्डे की अध्यक्षता वाली बेंच ने नोटिस जारी किया। आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में रखी, जिसमें कहा गया है कि इस दवा का बीमारी पर न के बराबर असर है। याचिकाकर्ता का कहना था कि मीडिया के जरिये इस दवा का प्रचार कर लोगों को ठगा जा रहा है। पिछले 16 सितम्बर को इस मामले पर सुनवाई टालते हुए कोर्ट ने कहा था कि सरकार ने इस पर नियम बनाए हैं। आप पहले इसके नियम देखिए। क्लीनिकल ट्रायल के बाद ही दवा बाजार में आती है। सरकार ने इन दवाओं को मंजूरी दी है। याचिका वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि रेमडेसिविर और फेबिपेरिवर नामक दवाइयों को बिना वैध लाइसेंस के कोरोना की दवा के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इन दवाइयों का अभी ट्रायल चल रहा है। ऐसे में इनका दवा के रूप में इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। याचिका में कहा गया है कि इन दवाइयों के इस्तेमाल के बाद 300 से ज्यादा डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। याचिका में इन दवाइयों का निर्माण करने वाली कंपनियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की गई है।


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