धन्य हैं मैहर के डॉक्टर जिन्हें एक्सरे देखने तक का ज्ञान नहीं

 

मैहर। डाक्टरों को तो भगवान का दर्जा दिया जाता है किन्तु जब वही डाक्टर मरीजो का शोषण करने लगे तब उन्हें किस संज्ञा से नवाजा जाय आप खुद ही सोच सकते हैं। इस कोरोना काल में जब आम जनता इस अदृश्य बीमारी से भयभीत और परेशान है ऐसे में भगवान न करे कि किसी को कोई अन्य बिमारी हो और उसे यहां के चिकित्सको के पास जाना पड़े क्योंकि मैहर के चिकित्सक गरीब मरीजो को चूसने के अलावा उन्हें ठीक करना ही नहीं जानते यह कहा जाय तो कोई अतिसंयोक्ति नहीं होगी। पन्द्रह बीस वर्ष पहले इसी शासकीय सिविल अस्पताल में एक से एक अनुभवी एवं योग्य डाक्टर हुआ करते थे जिनका उद्देश्य गरीब मरीजो का उचित ईलाज करना होता था और पूरी तत्परता के साथ लगकर मरीजो का ईलाज करते थे और अधिकांश मरीज यहीं से ठीक होते थे। उस समय कोई जुदवी केश हुआ करते थे जिन्हें सतना या अन्यत्र रेफर किया जाता था। किंतु अब तो मैहर सिविल अस्पताल का यह हाल है कि यहां पर पदस्थ डाक्टर साधारण बुखार,टाईफाइड व निमोनिया तक के मरीज को भी स्वस्थ्य नहीं कर पा रहे यह कितना दर्भाग्य है और अंत में मरीजो को विवश होकर सतना में ईलाज कराना पड़ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि मैहर के चिकित्सक या तो कुछ जानते ही नहीं अथवा जान बूझकर मरीजों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं यह भी एक विचारणीय है। मैहर सिविल अस्पताल में इस समय संविदा डांक्टरो की भरमार है। कुछ तो मेडिकल कालेज की पढ़ाई पूरी कर मैहर अस्पताल में ही सीखने के लिये सरकार उनकी नियुक्ति कर रही है ऐसा प्रतीत होता है। क्योंकि इन नवयुवक चिकित्सकों के पास न तो मरीज के परिजनों से बात करने का सलीका है और ना ही उन्हें बिमारियों के ईलाज का ज्ञान है। अभी एक सप्ताह पहले मैहर के वार्ड क्रमांक 24 की एक महिला को निमोनिया हो गया था जहां कि उसके पूरे चेहरे में सूजन आ गई थी। उक्त महिला के परिजनों ने मैहर के एक नामी डाक्टर आर.एन.पाण्डेय जो बीआरएस लेकर अपनी क्लीनिक चला रहे हैं उन्हें दिखाया और डाक्टर ने उस महिला का एक्स रे व कई अन्य जांच कराने को कहा। महिला के परिजनों ने पूरी जांच कराकर उस रिपोर्ट को भी डा.आर.एन पाण्डेय को दिखाया जहांकि डा.पाण्डेय ने एक्स रे सहित सभी रिपोर्ट को देखकर परिजनों से कहा कि उक्त महिला की पूरी रिपोर्ट सही है। परिजनो द्वारा डांक्टर से कहा गया कि अगर इसकी रिपोर्ट सही है तो फिर उसके चेहरे में सूजन व बुखार क्यों आ रही है। इस महिला के परिजनों द्वारा तीन दिन तक डा.आर.एन.पांडेय से ईलाज कराया गया और कोई आराम न मिलने पर चौथे दिन सतना में डा.बी.एल गुप्ता को जांच रिपोर्ट व वही एक्स रे तथा मरीज को दिखाया गया जहां कि डांक्टर ने एक्स रे रिपोर्ट देखते ही बता दिया कि उक्त महिला को तो निमोनिया है। और तुरंत निमोनिया के इंजेक्शन व टेबलेट चलाकर उस महिला को पूर्णतः स्वस्थ्य कर दिया। इस तरह की कई शिकायतें मैहर के चिकित्सको की मरीज के परिजनों द्वारा की जा रही है। अर्थात जो मरीज मैहर में ठीक नहीं हुये वही सतना में ईलाज कराने के बाद ठीक हो गये। एक और कारनामा यहां के एक प्राइवेट चिकित्सक का है जो कि दिल को दहला देने वाला है। राकेश द्विवेदी का पांच वर्षीय पुत्र यश द्विवेदी जिसे डबल निमोनिया होने पर परिजनो द्वारा उसे डा.विक्रम सिंह के अस्पताल ले जाया गया उस समय डा.विक्रम सिंह मैहर से बाहर थे उस दौरान उनकी पत्नी डा.रूबी सिंह जो दंत चिकित्सक है उनके द्वारा तीन दिन तक ईलाज किया गया। तबयित में कोई सुधार न होने पर परिजनों द्वारा डा.रूबी सिंह से शिकायत की गई तब उन्होंने कहा कि इस मर्ज का धीरे-धीरे आराम होता है दो चार दिन में ठीक हो जायेगा। और अंत में चौथे दिन 10 सितम्बर को उसकी असमय मौत हो गई। अब सवाल यह उठता है कि जब डा.रूबी सिंह दंत चिकित्सक हैं तो उन्हें यह केस हैंडिल नहीं करना था और परिजन को उचित सलाह देती ताकि परिजन समय रहते कहीं अन्यत्र बढ़िया ईलाज करा लेते तो शायद वह बच्चा बच सकता था। इस मृतक बालक के दुखी परिजनो ने वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुये संपूर्ण मामले की जांच कर दोषी डांक्टर के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही किये जाने कि मांग की है ताकि कोई अन्य गरीब का बच्चा इस तरह से काल कवलित होने से बच सकें।

blat