विडंबना 72 साल बाद भी नहीं बनी सलेमपुर गांव की डगर

 

हरदोई(लक्ष्मीकान्त पाठक) विकासखंड अहिरोरी के ग्राम पंचायत डही अंतर्गत ग्राम सलेमपुर की दल दल रूपी 900 मीटर डगर का नहीं हुआ विकास देश की आजादी के 72 वर्ष से अधिक समय बीत गया प्रदेश से लेकर केन्द्र सरकार तक विकास का तैयार रोड मैप दिखाकर वोट मांग रही है लेकिन अभी भी कई ऐसे गांव हैं, जो मुख्य सड़क से जुड़ नहीं पाये हैं गड्ढों में तब्दील कच्ची सड़क से ग्रामीणों को दो-चार होना पड़ता है। बताते चलें जिला हरदोई अंतर्गत ग्राम पंचायत डही का मजरा ग्राम सलेमपुर है, जहां के ग्रामीणों को अभी तक पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है तेज पाल, अजय अवस्थी, जय प्रकाश, राम प्रकार, भान्नू, तुलसीराम,आशीष कुमार, सीताराम, मनोज श्रीवास्तव, राम स्वरूप, गोपाल वर्मा नील कंठ गोतम अजीत सिंह यादव, आदि ग्रामवासियों ने दुखी मन से बताया कि इस गांव में पक्की सड़क न होने की बजह से कोई आदमी यहां अपने लड़के लड़कियों की शादी नहीं करना चाहता इसके साथ साथ गांव की मुख्य समस्या भड़ायाल ड्रेन नहर है जो गांव के बाहर से निकली है आजादी के इतने बरस बाद भी बारामासी भड़ायल ड्रेन नाम से मशहूर नहर के ऊपर कोई भी पुल या पुलिया का निर्माण नहीं हो सका चुनाव कोई भी हो हर प्रत्याशी मुद्दा यही उठता है हर गांव इस उम्मीद से मतदान करता है कि अब शायद हमारे गांव का विकाश हो जाए लेकिन बाद में गांव वालो के हाथ सिर्फ निराशा ही आती है सड़क के अभाव में गांव में विकास की किरण आज तक नहीं पहुंच सकी है ग्रामीणों ने यह भी बताया कि गांव को बसे सैकड़ो दशक बीत चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है ऐसे में यातायात की सुविधा दूर की कौड़ी है देश आजाद होने के बाद गुलामी जैसा जीवन व्यतीत करना इस गांव वालो की नियति बन चुकी है गांव के व्यक्ति बताते है आजादी के क्या मायने होते है पता नहीं सुविधाओं के आभाव में गांव के कई परिवार पलायन कर चुके है सड़क के आभाव में यातायात नहीं है इसीलिए शाम होने से पहले गांव पहुंचना मजबूरी बन चुका है चुनाव के समय ग्राम प्रधान पद प्रत्याशी से लेकर बड़े बड़े नेता बहुत वादे करते है लेकिन चुनाव के बाद सब भूल जाते है वहीं अन्य लोगों ने बताया गांव में सिर्फ प्राथमिक जूनियर विद्यालय है आगे की पढ़ाई के लिए उसी दलदल नुमा सड़क और नहर को पार करके जाना पड़ता है जिसमें जान का खतरा भी होता है जो परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं उनके खंडहरनुमा आवास इसकी निशानी है वहीं पिछले कई महीनों से भारतीय किसान यूनियन लोकतांत्रिक ने इस मुद्दे पर कई आला अधिकारियों को ज्ञापन दिया है इसी महीने की 22 तारीख को भाकियू, ने नयागांव बाजार में इसी मुद्दे को लेकर एक दिवसीय धरना भी दिया था लेकिन आला अधिकारियों ने तो जैसे कसम ही खा ली है कि इसे हमेशा की तरह ठंडे बस्ते में डालने की वही इस विषय पर भाकियू,जिला अध्यक्ष पुनीत मिश्रा ने बताया कि अगर इस मुद्दे पर उचित कार्यवाही नहीं की गई तो भाकियू इससे बड़े धरने देने पर विवश होगा।

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