शुकुल बाजार अमेठी । शासन की मंशा पर पानी फेर रहे ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी पीली ईट और घटिया सामग्री से बनवा रहे गौशालाऐ। ग्रामसभा ब्यौरेमऊ में ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही गौशालाऐ बताते चलें जहां क्षेत्र के अधिकाधिक शौचालय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए और शासन की मंशा पर पानी फेर दिया गया वहीं अब शासन के द्वारा जहां भारी भरकम रकम खर्च करके आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए और गोवंश की रक्षा के लिए गौशालाए निर्मित कराई जा रही है वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत के चलते गौशालाए भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। लाभार्थियों की मानें तो उन्हें धनराशि ना देकर प्रधान द्वारा सामग्री मुहैया कराई जा रही है जिसमें एक ट्राली डस्ट, दो ट्राली बालू, तीन ट्राली पीली ईट और छत पर डालने के लिए टीना मुहैया कराया जा रहा है। पीली ईट और घटिया सामग्री से तैयार यह गौशालाए कितने दिन चलेगी ईश्वर जाने जबकि शासन द्वारा अच्छी खासी रकम निर्धारित की गई है। अगर पारदर्शिता और ईमानदारी पूर्वक गौशालाओं का निर्माण कराया जाए तो यह गौशालाए किसानों पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं। लेकिन शौचालय के तर्ज पर ही गौशालाए भी बनवाई जा रही है जो कि शासन की मंशा पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है। जबकि क्षेत्र के विकास के लिए केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद स्मृति जुबिन ईरानी सक्रिय दिखाई दे रही है क्षेत्रीय विधायक और राज्यमंत्री सुरेश पासी भी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए वचनबद्ध दिखाई दे रहे हैं उसके बाद क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और क्षेत्रीय अधिकारियों को किसी का डर नहीं डीएम का डर ना सीएम का डर। सबसे बड़ी बात यह है कि ग्राम प्रधान एवं ग्राम विकास अधिकारी यह भी बताने से गुरेज करते हैं कि इन गौशालाओं की अनुमानित लागत क्या है।

क्या बोले ग्राम विकास अधिकारी

इस संदर्भ में जब ग्राम विकास अधिकारी राकेश से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा मेरी जानकारी में घटिया ईट और घटिया सामग्री नहीं है जांच की जाएगी अगर घटिया ईट का प्रयोग हो रहा है तो कार्रवाई होगी लेकिन अनुमानित लागत नहीं बता पाए। वही ग्राम सभा में एक नाली का निर्माण हो रहा है जिसमें भी पीली ईट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्या बोले ग्राम प्रधान

इस संदर्भ में ग्राम प्रधान का कहना है कि बिना प्रस्ताव के नाली का निर्माण कराया जा रहा है इसमें हम जैसी इच्छा है वैसी इस्तेमाल कर सकते हैं चाहे तो कच्ची ईंट का इस्तेमाल करें। 54 ग्राम सभाएं हैं क्या मेरी ही ग्राम सभा पूरी ग्रामसभा देखी जाए और हमारे भी लड़के बच्चे हैं आखिर कहां से खाएंगे।

जबकि सरकार ग्राम सभा की विकास के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च करती है लेकिन प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों की मिलीभगत के चलते घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। वही इस संदर्भ में खंड विकास अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो संपर्क नहीं हो सका।फिलहाल ग्राम वासियों ने शासन प्रशासन एवं उच्च अधिकारियों से गौशालाओं की गुणवत्ता की जांच एवं नाली निर्माण सहित सभी कार्यों की स्थलीय निरीक्षण कराए जाने की मांग की है।


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