सहकारी समिति के कर्मचारियों को वेतन के लाले

उरई/जालौन। जिले की सहकारी समितियों में तैनात कर्मचारियों को वेतन के लाले हैं। लॉकडाउन के बाद से वेतन नहीं मिला है। कई कर्मचारी एक साल से ज्यादा समय से बिना वेतन के काम कर रहे हैं। ऐसे में इनके घर की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा रही है। लॉकडाउन में परिवार की गुजर बसर करना मुश्किल हो गया है। इनका कहना है कि वेतन न मिलने से त्योहार फीका हो जाएगा। ठड़ेश्वरी मंदिर परिसर में आयोजित सहकारी समिति कर्मचारी संघ की बैठक में कर्मचारियों ने वेतन की मांग को लेकर नारेबाजी की। संगठन के अध्यक्ष नीरज वर्मा ने बताया कि जिले में 68 सहकारी समितियां हैं। इनमें करीब 555 कर्मचारी काम करते हैं। हर समिति में सचिव, आंकिक (अकाउंटेंट), सहयोगी, चपरासी कम चौकीदार समेत चार पद होते हैं। समितियों में खाद वितरण, बीज वितरण, मिनी बैंकिंग का काम होता है। किसानों को सस्ता कर्ज दिया जाता है। शासन प्रशासन से वसूली का दबाव रहता है। कम वसूली होने पर कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जाता है। कहीं कम तो कहीं ज्यादा वसूली होती है। वेतन सभी कर्मचारियों का रोक दिया जाता है। कर्मचारियों को साढ़े सात हजार से 28 हजार रुपये तक वेतन मिलता है। यह समय पर न मिलने से परेशानी होती है। कर्मचारियों ने समस्याओं को लेकर डीएम और एआर सहकारिता को ज्ञापन भी दिया। इस दौरान रविंद्र, सर्वेश, ओमजी, राजेंद्र, भारत सिंह, मनीष तिवारी, विनय, श्यामबिहारी, सुरेंद्र, देवेंद्र सिंह आदि रहे।

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