रूस की वैक्सीन Sputnik-V दुनिया की पहली रजिस्टर्ड वैक्सीन है. वैक्सीन के सफल होने का दावा करने के बाद भारत के डॉक्टर रेड्डीज लैब ने भी इसे लेकर रूस के साथ एक करार किया था. हालांकि इस करार को अब एक झटका लगा है.
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO)ने पहले इस वैक्सीन का छोटे स्तर पर ट्रायल करने को कहा है. सीडीएससीओ के विशेषज्ञों के एक पैनल का कहना है कि विदेशों में Sputnik-V के किए जा रहे प्रारंभिक चरण की स्टडी में इसकी सुरक्षा और इम्युनोजेनेसिटी को लेकर बहुत कम डेटा मिला है. इसमें भारतीय वॉलंटियर्स का कोई इनपुट भी नहीं है.
रूस की वैक्सीन का ट्रायल जारी है और वो जल्द ही इसके नतीजे जारी करने वाला है. ऐसे में भारत के इस कदम से यहां वैक्सीन की मंजूरी लेने की रूस की योजना को झटका लगा है. आपको बता दें कि रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड (RDIF) और डॉक्टर रेड्डीज लैब के बीच पिछले महीने ही भारत में रूस की वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल और वितरण के लेकर करार हुआ था.
रूस पहला ऐसा देश है जिसने कोरोना वायरस वैक्सीन की रेगुलेटरी मंजूरी हासिल कर ली है और ट्रायल खत्म होने से पहले ही अपने लोगों को वैक्सीन देना शुरू कर दिया है. रूस के इस कदम पर दुनिया भर के डॉक्टर्स और वैज्ञानिकों ने चिंता भी जताई थी.
वहीं अपनें लोगों को Sputnik V वैक्सीन उपलब्ध कराने के बाद रूस अब एक और वैक्सीन लॉन्च करने की तैयारी में है. रूस की इस वैक्सीन का नाम एपीवैककोरोना (EpiVacCorona) है. क्लिनिकल ट्रायल में ये वैक्सीन सफल साबित हुई है. उम्मीद जताई जा रही है कि ये वैक्सीन 15 अक्टूबर को लॉन्च की जाएगी.
ये वैक्सीन साइबेरिया के वेक्टर स्टेट वायरॉलजी रिसर्च सेंटर ने बनाई है. रिसर्च सेंटर का कहना है कि प्रायोगिक वैक्सीन एपीवैककोरोना अपने प्रारंभिक चरण के ट्रायल में कारगर साबित हुई है. वेक्टर रिसर्च सेंटर का कहना है कि एपीवैककोरोना वैक्सीन इम्यून रिस्पॉन्स पर काम करती है.


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