कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सस्ते और बेहतर इलाज की उम्मीद लगाकर संयुक्त जिला चिकित्सालय आ रहे मरीजों को अनेक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। जनरल वार्ड में न तो बेड पर चादर मिल रही है और न ही इस गर्मी में पंखे ही चल रहे हैं। ज्यादातर पंखे खराब होने की वजह से मरीजों को गर्मी में बेहाल होना पड़ रहा है। तीमारदारों की मानी जाए तो रात में मरीजों की हालत बिगड़ने पर कहने के बावजूद स्वास्थ्यकर्मी समय पर नहीं पहुंचते। कोई मरीज अपना दवा कराने पहुचता है तो दलाल ही पर्ची लेकर डाक्टर के केबिन तक पहुचा कर उनकी पर्ची पर दवाई बाहर वाली लिखवाते हैं! 100 बेड के संयुक्त जिला चिकित्सालय रविन्द्र नगर में 50-50 बेड के दो जनरल वार्ड हैं, जहां सीएचसी-पीएचसी के रेफरल मरीजों के अलावा सीधे भी लोग इलाज कराने पहुंचते हैं। तो पर्ची कटाते ही मरीजों की पर्ची दलाल अपने हाथों में लेकर उस डाक्टर को दिखाते जो उनके मुताबिक बाहरी दवाई लिखता है! बताया जाता है कि इसमें डाक्टर भी शामिल हैं! जिनको दवाई के दुकानों से कमीशन मिलता है! इस बात को लेकर विगत दिनों कई शिकायत किये गए! किन्तु इसमें सुधार नही हुआ! एक सेमरिया खुर्द निवासी विगत दिनों दो बार जिला अस्पताल अपनी दवाई कराने पहुंचा तो दलालों उन्हें रोक कर पर्ची लेकर डाक्टर से दवाई लिखवाई जो अपने चहेतो मेडिकल स्टोर से पैसा मरीज से लेकर ईलाज कराया! कोरोना संकटकाल के पहले तो इस मौसम में मरीजों की संख्या इतनी अधिक हो जाती थी कि कभी-कभी एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ता था। कई मर्तबा तो चबूतरे और फर्श पर लिटाकर मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। इधर, कोरोना संकटकाल में मरीजों की संख्या घटने के बावजूद सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं दिख रहा है। अक्सर शिकायत रह रही है कि वार्ड में भर्ती मरीजों के बेड पर न तो चादर रहती है और न ही पंखे चलते हैं। शुक्रवार को भी ऐसी ही स्थिति रही। इक्का-दुक्का बेड को छोड़ दें तो ज्यादातर बेड पर चादरें नहीं थीं। मरीज या तो बिना चादर के ही बेड पर लिटाए गए थे या फिर घर से लाए चादर बिछाए थे। ज्यादातर पंखे भी खराब थे। गर्मी से बेहाल मरीज गमछा, कपड़े या हाथ से बने पंखे से गर्मी से निजात पाने की कोशिश कर रहे थे।


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