मध्य प्रदेश के उपचुनावों में सिंधिया की इज्जत दाँव पर…! 

नईम कुरेशी-

मध्य प्रदेश में और खास तौर से उत्तरी मध्य प्रदेश ग्वालियर चम्बल, मालवा व बुन्देलखण्ड में एक ही घर परिवार महल मंदिरों से कांग्रेस व भा.ज.पा. पार्टियाँ चलाई जा रही हैं। तीसरा विकल्प मध्य प्रदेश में कांग्रेस व भा.ज.पा. वाले चालाकी कर बनने नहीं दे रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस के अधिकतर नेता अपने परिवार के किसी एक सदस्य को दूसरे दल में पहले से तैयार रखते देखे जाते हैं। जब 1980-90 के दशक में माधवराव सिंधिया कांग्रेस में बड़े नेता रहे थे उसी दौर में राजमाता विजयाराजे सिंधिया व उनकी बेटियाँ वसुन्धरा व यशोधरा भारतीय जनता पार्टी में थीं व सत्ता का सुख भोग रहे। इसी परिवार के देखते देखते मध्य प्रदेश में और भी सामंत व राज परिवार इसी फार्मूले पर चलते देखे जा रहे हैं। जिसमें इन्दौर, देवास, बुन्देलखण्ड के छतरपुर, पन्ना आदि रहे हैं।

नौकरशाह लूट रहे हैं

मध्य प्रदेश में बेरोजगारी, अन्याय व जातिगत ऊँची जाति वर्ग के अत्याचार अब उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे दिखाई दे रहे हैं। यहाँ की नौकरशाही भी सियासतदां के सहारे खूब भ्रष्टाचारों में डुबकी लगाकर हजारों करोड़ों का गोलमाल करती देखी जा रही है। 1986 बैच के डी.जी. स्तर के परिवहन आयुक्त रहे 4 सालों तक श्रीवास्तव की 120 सम्पत्तियाँ आयकर विभाग के रडार पर जाँचों के दौर से गुजर रही हैं। इसी तरह के अन्य राजेन्द्र चतुर्वेदी जिन पर 12-14 विभागीय जाँचें थीं फिर भी उन्हें ए.डी.जी. तक पदोन्नत करा दिया गया था। अब एक साल से जेल में तमाम भ्रष्टाचार व गबन के आरोपों में बमुश्किल धरे गये हैं। इसी तरह अरविंद टीनू जोशी भी सैकड़ों करोड़ों के भ्रष्टाचारों के मामलों में जेलों में पिछले दिनों लम्बी जेल यात्रायें करते देखे गये हैं।

अभी हाल में पता चला है कि 79 बैच के आय.ए.एस. अफसर रमन कक्कड़ व लवलीन कक्कड़ पर भी लोकायुक्त पुलिस संगठन का शिकंजा कुछ कसा भी था पर उन पर कोई कारगर कार्यवाही नहीं हो सकी है। अरविंद जोशी व टीनू जोशी भी 79 बैच के अफसरान रहे थे। मध्य प्रदेश में अफसरों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार की तरह कठोर कार्यवाही न दिग्विजय सिंह ने की न ही शिवराज सिंह करते हैं। शिवराज सिंह खुद डम्फर कांड व व्यापमं कांडों में फंसे हुए बताये जाते हैं फिर भी वो काफी लोकप्रिय बने हुए हैं। मध्य प्रदेश में सिंधिया परिवार भी सियासतदां के तौर से काफी लोकप्रिय रहा था पर पिछले दिनों उन पर भी करोड़ों की सरकारी जमीनों को सरकारी धौंस डपट से हड़पने के आरोप कांग्रेसी लगाते देखे जा रहे हैं। ज्योतिरादित्व सिंधिया ने जमीनों के मामलों में कमलनाथ व शिवराज सिंह को दबावों में लेकर काफी कीमती जमीनें अपने ट्रस्टों व परिवारजनों के नाम पर करने में सफलता पाई है। इस मामले में सिंधिया अपने चुने हुए आय.ए.एस. अफसरों का भी सीधा लाभ लेते देखे गये हैं।

प्रद्युम्न तोमर लोकप्रिय हैं

इस बार ग्वालियर चुनाव के 16 विधानसभा के उपचुनावों व मालवा, बुन्देलखण्ड के 12 चुनावों में सिंधिया की शाख दांव पर लगी है। ग्वालियर इलाके में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को छोड़कर उनके दो-चार अन्य लोग ही यहां से सफल होने की संभावना सियासी पंडित बता रहे हैं। तोमर क्षेत्र के गरीबों, दलितों व अल्पसंख्यकों में काफी लोकप्रिय देखे जा रहे हैं। उनके विरुद्ध कांग्रेस से लड़ने वाले प्रत्याशी खुद संघ परिवार के लोगों से मिलकर खनिज लूट में शामिल बताये जा रहे हैं व कई कांग्रेस के पार्षदों का दावा है कि उन्हें सुनील शर्मा ने ही संघ वालों से मिलकर हरवाया था। इसी तरह की कहानियां और भी हैं। जो ये बताती हैं कि कांग्रेस की कोई विचारधारा इस इलाके में नहीं बची हैं। सिंधिया के कांग्रेस से चले जाने से कांग्रेस में शायद कुछ कांग्रेसी सक्रिय हो जायें क्योंकि सिंधिया के सामंती मिजाज से कांग्रेसी लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गये थे।

भारतीय जनता पार्टी यदि संघ परिवार का साम्प्रदायिक ऐजेण्डा छोड़ सीधी सियासत करे तो उसके साथ दलित पिछड़े व अल्पसंख्यक भी कुछ जुड़ सकते हैं पर भा.ज.पा. का मंदिर-मस्जिद, हिन्दू-मुसलमान व शांति-सद्भावना के खिलाफ ऊँची जातियों को संगठित कर उन्हें सत्ता की मलाई खिलाना भर ऐजेण्डा रहा है। जिससे देश का विकास एकाएक रुक गया है। सत्ता की मलाई भारतीय जनता पार्टी अपने कांग्रेसी मित्रों से मिलकर कम्बल ओढ़कर पीने का काम करती देखी जा रही है। हर तरफ ऊँची जाति के लोग एस.डी.एम. नगर पुलिस अधीक्षक तहसीलदार व थानेदार बनाकर रखे गये हैं। दतिलों व पिछड़ों को 15 सालों से नजरअंदाज किया जा रहा है। 5 जिलों में से मध्य प्रदेश भर में मात्र 3-4 लोग ही जिलों में दलित वर्ग से कलेक्टर बनाये जा सके हैं। यही हाल पुलिस अधीक्षकों का है जबकि दलित पिछड़े प्रदेश में 60 फीसद से भी ज्यादा हैं। अ.जा.क. वर्ग के संगठन ने हाल ही में ये मांग रखी है कि दलित वर्ग के आय.ए.एस. जो दतरों में दाखिल कर रखे जा रहे हैं उन्हें जिलों में कलेक्टर बनाकर रखा जाये पर संघ का ऐजेण्डा सिर्फ और सिर्फ ऊँची जाति को सत्ता दिलाना व देना भर है।

 

blat