देरी से टनल निर्माण की लागत तीन गुणा बढ़ी, सेना की जरूरतों को नहीं समझा गया : पीएम मोदी

-मोदी ने की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अटल रोहतांग सुरंग राष्ट्र को समर्पित

मनाली/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिमाचल प्रदेश में मनाली-लेह मार्ग पर निर्मित सामरिक रूप से महत्वपूर्ण और सभी मौसम में खुली रहने वाली अटल रोहतांग सुरंग आज राष्ट्र को समर्पित की जिससे मनाली और लेह की बीच की दूरी लगभग 46 किलोमीटर कम होने के साथ ही आवागमन का समय भी 4-5 घंटे कम हो जाएगा। श्री मोदी ने लगभग दस बजे इस सुरंग का उद्घाटन किया।

प्रधानमंत्री साउथ पोर्टल से नार्थ पोर्टल के लिए खुली जिप्सीज में रवाना हुए। नरेंद्र मोदी ने आपातकालीन टनल का जायजा लिया। पीएम मोदी ने लाहुल स्पीोति जिला में टनल के दूसरे छोर नार्थ पोर्टल पर पहुंच कर बस को हरी झंडी दी। इस बस में लाहुल के बुजुर्गों ने सफर किया। प्रशासन ने 15 बुजुर्गों का चयन किया था, जिसमें से 14 लोग बस में सवार थे। पीएम मोदी ने बीआरओ को सुझाव दिया 1500 ऐसे लोग चिह्नित करें, जाे अपना अनुभव लिखें। इसमें मजदूरों व इंजीनियरों को शामिल करें। शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया कि तकनीकी शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों से केस स्टडी करवाएं। दुनिया को हमारी इस ताकत का ज्ञान होना चाहिए।

पीएम मोदी ने कहा वायुसेना आधुनिक लड़ाकू विमान मांगती रही, लेकिन फाइल पर फाइल खोली गई। आयुध डिपो पर ध्यान नहीं दिया गया। तेजस को डिब्बे में बंद करने के प्रयास किए गए। सीडीएस से बेहतर समन्वय बना है। मोदी ने कहा सेना के लिए देश में हथियार बनेंगे। भारतीय संस्थानों को बढ़ावा दिया गया है व कई विदेशी कंपनियों को वैन किया गया। पीएम मोदी ने कहा देरी से लागत तीन गुना बढ़ गई। सीमा क्षेत्र पर कनेक्टिविटी तेजी से होनी चाहिए, लेकिन सेना की जरूरतों को नहीं समझा गया। लदाख में दोलत बेग ओल्डी एयर स्ट्रिप 40 साल बंद रखी, ऐसी क्या मजबूरी थी। असम में पुल का काम अटल के समय शुरू हुआ था। कोसी महासेतु के काम पर ध्यान नहीं दिया गया। हमारी सरकार में पुल पर तेजी से काम किया।

पीएम मोदी बोले, मेरा बहुत बड़ा सौभाग्यट है जो अटल टनल के लोकार्पण का अवसर मिला। बतौर भाजपा प्रभारी हिमाचल से गहरा नाता रहा है। अटल जी जब प्रीणी स्थित आवास पर आते थे तो वह तत्काललीन मुख्यरमंत्री प्रेम कुमार धूमल के साथ उनसे मिलते थे। अटल जी से सुरंग निर्माण को आग्रह करते थे और बाद में यही प्रोजेक्टब उनका सपना बन गया। आज यह सपना पूरा हो गया। अभेद्य पीरपंजाल को भेदकर, आज कठिन स्थिति से पार पाया गया है। जान जोखिम में डालने वाले, जवानों, इंजीनीयरों मजदूरों को नमन करता हूं।

लाहुल के उत्पााद दिल्ली तक पहुंचेंगे। टनल से देश को नई ताकत मिलेगी। देश की सुरक्षा व समृद्धि का बड़ा जरिया है। लंबे समय से मांग होती रही, मगर प्लानिंग का हिस्सा नहीं बना। अटल सरकार जाते ही टनल को भूला दिया गया। 2013 तक मात्र डेढ़ किलोमीटर काम हुआ था। ऐसे काम चलता रहता तो 2040 तक काम पूरा होता, 2014 से तेजी लाई गई। 300 मीटर की जगह टनल बनाने की रफ्तार 1300 मीटर प्रति वर्ष हुई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा मोदी ने हमेशा अटल टनल की चिंता की। अनुमानित लागत पर काम पूरा किया, बीआरओ बधाई का पात्र है। सामरिक दृष्टि से टनल महत्वपूर्ण है। अब रसद तेजी से सीमा पर पहुंचेगी। राजनाथ सिंह ने कहा जब टनल बननी थी तो मोदी हिमाचल के प्रभारी थे और आज प्रधानमंत्री के रूप में शुभारंभ कर रहे हैं, ये संजोग बहुत सुखद है।

डॉक्यूेमेंट्री दिखाने के बाद मुख्य मंत्री जयराम ठाकुर ने पीएम मोदी का स्वाेगत किया। सीएम ने कहा आज ऐतिहासिक दिवस, प्रदेश ही नहीं देश का सपना साकार हुआ। रोहतांग दर्रा लाहुल के विकास में बाधा था, जो अब दूर हुआ। हिमाचल छोटा राज्यी है, लेकिन इसका देश के लिए योगदान हमेशा बड़ा रहा है। कारगिल युद्ध में चार में से दो परमवीर चक्र हिमाचल के जांबाजों को मिले।

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ, राज्य के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, सीमा सड़क संगठन के महानिदेशक ले. जनरल हरपाल सिंह, हिमाचल प्रदेश के अनेक सांसद, विधायक, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, सुरंग की निर्माता निजी कम्पनी के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

उन्हें इस मौके पर बीआरओर के महानिदेशक हरपाल सिंह ने इन्हें सुरंग की विशेषताओं, निर्माण तकनीक और इसके सामरिक महत्व की भी जानकारी दी। मोदी लगभग नौ बजे हैलीकॉप्टर से यहां सासे हेलीपैड पहुंचें जहां रक्षा मंत्री राजनाथ, राज्य के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर समेत अन्य गणमान्यों ने उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री इससे पहले दिल्ली से चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचे जहां से वह हैलीकॉप्टर से मनाली के लिये रवाना हुये। मनाली पहुंचने के बाद वह सड़क मार्ग से उद्धाटन के लिये धुंधी में सुरंग के साउथ पोर्टल पहुंचे।

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