अटल टनल रोहतांग के निर्माण में लाई तेजी, तय सीमा में पूरा किया काम, नहीं तो 2040 तक पूरा नहीं होता : मोदी

कुल्लू। अटल टनल रोहतांग के लोकार्पण अवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अटल टनल हिमाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से के साथ-साथ नए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की भी लाइफ लाइन बनने वाला है। अब हिमाचल प्रदेश का यह बड़ा क्षेत्र और लेह लद्दाख देश के बाकी हिस्सों से हमेशा जुड़े रहेंगे। मोदी ने कहा कि इस टनल से मनाली और कलम के बीच की दूरी 3-4 घंटे कम हो जाएगी। लेह लद्दाख के किसानों, वागवानों व युवाओं के लिए भी अब देश की राजधानी दिल्ली और दूसरे बाजार तक उनकी पहुंच आसान हो जाएगी। अटल टनल भारत के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को भी नई ताकत देने वाली है। यह विश्वस्तरीय बॉर्डर कनेक्टिविटी का जीता जागता प्रमाण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की मांग उठती रही है। लेकिन लंबे समय तक हमारे यहां बॉर्डर से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर लंबित पड़े हैं। मोदी ने कहा कि पूर्व की सरकारों में कई प्रोजेक्ट या तो लटक गया भड़क गए। उन्होंने कहा कि अटल टनल रोहतांग के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ 2014 तक इसकी गति बहुत धीमी थी और ऐसा लगता था कि या 2040 तक बनकर तैयार होगी लेकिन हमारी सरकार में आने के बाद हमने प्रतिवर्ष 1600 मीटर तक इसके बनाने का काम पूरा किया और मात्र 6 सालों में ही इस प्रोजेक्ट को पूरा किया। कहा कि हालांकि साल 2013 तक सिर्फ 1300 मीटर ही टनल बनी थी। हर साल पहले 300 मीटर सुरंग बन रही थी।उसकी प्रगति बढ़ाकर 1400 मीटर प्रति वर्ष हो गई सिर्फ 6 साल में हमने 26 साल का काम पूरा कर लिया।

मोदी ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर के इतने अहम और बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण में देरी से देश का हर तरह से नुकसान होता है। इससे लोगों को सुविधा मिलने में तो देरी होती इसका खामियाजा देश को आर्थिक स्तर पर उठाना पड़ता है। साल 2005 में यह आकलन किया गया था यह तनल लगभग 930 सौ करोड रुपए में तैयार हो जाएगी लेकिन लगातार होती देरी के कारण आगे तीन गुना से भी ज्यादा यानी करीब करीब ₹3200 करोड़ से अधिक खर्च करने के बाद पूरी हो पाई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी का देश के विकास से सीधा संबंध होता है। ज्यादा से ज्यादा कनेक्टिविटी यानी उतना ही तेज विकास कर बॉर्डर एरिया में तो कनेक्टिविटी सीधे-सीधे देश की रक्षा जरूरतों से जुड़ी होती है। लेकिन इसे लेकर जिस तरह की गंभीरता और उसकी आवश्यकता है वह दुर्भाग्य से हुआ नहीं। उन्होंने कहा कि दौलत बेग ओल्डी के रूप में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हवाई पट्टी भी 40 साल तक नहीं बन पाई। हमारी सरकार आने के बाद वायु सेना ने शुरू की। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में चाहे वह हिमाचल हो, जम्मू कश्मीर हो, उत्तराखंड हो सिक्किम हो, अरुणाचल प्रदेश हो, सभी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं और अनेकों प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है।

उन्होंने कहा कि सड़क बनाने का काम हो फूल बनाने का काम हो सुरंग बनाने का काम हो इतने बड़े स्तर पर देश में इन क्षेत्रों में पहले कभी काम नहीं हुआ। इसका बहुत बड़ा लाभ सामान्य जनों के साथ ही हमारे फौजी भाई बहनों को भी हो रहा है। सर्दी के मौसम में उन तक रसद पहुंचाना हो, उनकी रक्षा से जुड़े साजो सामान हो वह आसानी से पेट्रोलिंग कर सके।

मोदी ने कहा कि इसके लिए सड़कों का जाल बिछाया जा रहा। वन रैंक वन पेंशन को लेकर पहले की सरकारों ने लटकाए रखा। सिर्फ बातें ही की। कागजों में सिर्फ 500 करोड़ रुपए दिखा कर यह लोग कहते थे कि वन रैंक वन पेंशन लागू करेंगे। लेकिन इस वायदे को हमने पूरा किया। हिमाचल प्रदेश के करीब एक लाख फौजी साथियों को इसका लाभ मिला है।

मोदी ने कहा कि हमारी सरकार के फैसले साक्षी है। हमने जो फैसले की लागू करके दिखाते हैं। देश की रक्षा से बड़ा हमारे लिए और कुछ नहीं है। लेकिन देश में लंबे समय तक वह दौर भी देखा है जब देश की रक्षा के साथ समझौता किया गया। स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के लिए मजबूत करने पर उतना ध्यान नहीं दिया। वर्षों तक सत्ता में बैठे लोगों के स्वार्थ में हमारी सैन्य क्षमताओं को मजबूत होने से रोका है। उसका नुकसान किया है। तेजस लड़ाकू विमान गर्व है। उसे भी इन लोगों ने डिब्बे में बंद करने की तैयारी कर ली थी। देश में बहुत समय के बाद सीडीएस की स्थापना की गई है। मोदी ने कहा कि हिमाचल पर मेरा कितना अधिकार है। यह तो मैं नहीं कह सकता हूं लेकिन हिमाचल का मुझ पर बहुत अधिकार है।

इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बीआरओ नया जान हथेली पर रखकर इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है। इस भ्रम को तय बजट में ही बीआरओ ने पूरा किया है यह बधाई के पात्र हैं। इस अवसर पर हिमाचल के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि अटल टनल रोहतांग के बनने से देश का सपना साकार हुआ है। जय राम ठाकुर ने कहा कि टनल के दोनों छोरों पर पर्यटन को विकसित किया जाएगा।

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