प्राचीन कुबेरस्थान में स्थित शिव मंदिर विवाद

मामला कुबेरस्थान (कुशीनगर) में स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर का जहां केवल SDM के मौखिक आदेश पर इस 2 महंत बना दिए गए है
माना जाता है इस मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है क्षत्रिय लोगों की मान्यता है कि रावण के चचेरे भाई रावण द्वारा अत्याचारों से परेशान होकर तपस्या करने हिमालय की तरफ निकल पड़े, जहां बीच के घने जंगलों में शिव जी की तपस्या करने लगे जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव जी पताल से उत्पन्न हुए,

सैकड़ों वर्ष पूर्व इसी जंगल में एक लकड़हारा लकड़ी काट रहा था जहां उसकी कुल्हाड़ी जमीन से उत्पन्न शिव लिंग से जा टकराई, जहां उसने दिव्य शिवलिंग को देखा, जिसकी सूचना पडरौना के उस समय के राजा भूप नारायण सिंह को सूचित किया, राजा दिव्य शिवलिंग को देख एक भव्य शिव मंदिर की स्थापना किए ,जिसका नाम कुबेरस्थान शिव मंदिर पड़ा, के प्रसिद्ध शिव मंदिर आस्था का स्थान माना जाता है, मान्यता है कि सच्चे मन से श्रद्धालु जो कुछ भी मांगता है वह मांग भगवान भगवान कुबेर स्थान शिव मंदिर के आशीर्वाद से पूरी होती है
सावन मास में कांवड़ यात्रा के समय लाखों की संख्या में श्रद्धालु कि यहां भीड़ उमड़ती है बाबा धाम जाने वाले भक्तगण इस शिव मंदिर पर जल चढ़ा का ही आगे जाते हैं इसकी प्रसिद्धि नेपाल के पशुपतिनाथ, गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर, बिहार के वैद्यनाथ के बराबर मानी जाती है
इस मंदिर की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मंदिर की पवित्र मिट्टी ध्यान भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के भूमि पूजन में प्रयोग किया गया जो देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा की गई थी

• वर्तमान में प्राचीन कुबेरस्थान शिव मंदिर विवाद
मामले की शुरुआत 31 अक्टूबर 2019 को हुई जब कमिश्नर के आदेश पर वर्तमान महंत राजू गिरी के पिता स्वर्गीय इंद्रासन गिरी को सेवादार बनाया गया, इसके उपरांत 5 फरवरी 2020 को राजस्व परिषद ने कमिश्नर के आदेश को स्थगित कर पुनः चंद्रशेखर ओझा को महंत बना दिया,
• 6 महीने बाद एसडीएम ने राजस्व परिषद एवं दीवानी के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए असंवैधानिक तरीके से केवल मौखिक आदेश पर जबरन राजू गिरी को महंत बनाया जिससे मंदिर में एक समय में दो महंत स्थापित हो गए हैं जोकि निराधार है
• इस मंदिर में 6 वर्ष पूर्व पुजारी की हत्या हो चुकी है एसडीएम की इस मौखिक आदेश पुनः विवाद को हवा दे रहा है
इसे लेकर शासन प्रशासन चुप्पी साधे हुए हैं

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