• January 23, 2021

गिलगित-बाल्टिस्ता न में 15 नवंबर को चुनाव कराएगी इमरान सरकार, पाकिस्तांन में घमासान

 गिलगित-बाल्टिस्ता न में 15 नवंबर को चुनाव कराएगी इमरान सरकार, पाकिस्तांन में घमासान

इस्लामाबाद। पाकिस्ताेन अधिकृत कश्मीरर के गिलगित-बाल्टिस्ताकन इलाके को लेकर पाकिस्ताान में सेना और विपक्षी दलों में घमासान के बीच इमरान खान सरकार ने वहां पर 15 नवंबर को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। पाकिस्ता न के राष्ट्ररपति आरिफ अल्वी5 ने बुधवार को गिलगित और बाल्टिस्ताान में विधानसभा चुनाव कराने के बिल को अपनी मंजूरी दे दी। अल्वील ने इस बिल को ऐसे समय पर मंजूरी दी है जब पाकिस्ता नी सेना प्रमुख के इशारे पर हो रहे इस चुनाव को लेकर व‍िपक्ष हमलावर है।

पाकिस्ता‍नी अखबार एक्स‍प्रेस ट्रिब्यू।न के मुताबिक गिलगित-बाल्टिस्ताोन में होने वाले इस विधानसभा चुनाव में तीन प्रमुख राजनीतिक दल इमरान की पीटीआई, नवाज शरीफ की पीएमल एन और बिलावल की पार्टी पाकिस्ताानी पीपुल्सक पार्टी हिस्साज लेगी। गिलगित-बाल्टिस्तांन विधानसभा में 33 सीटें होंगी और इसमें से तीन ट्रेक्नो्क्रेट और 6 महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी। चुनाव केवल बची हुई 24 सीटों पर ही होंगे।

गिलगित-बाल्टिस्‍तान को प्रांत का दर्जा दिया
पाकिस्ताुन सरकार का दावा है कि इस चुनाव में सात लाख लोग मतदान करेंगे और इसमें से 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे पहले पाकिस्ता न सरकार ने 17 सितंबर को गिलगित-बाल्टिस्तांन को प्रांत का दर्जा दिया था। सूत्रों के मुताबिक पाक सेना ने भारत के जम्मूर-कश्मीिर के विशेष राज्यं के दर्जे को खत्मद करने के बाद यह फैसला लिया है। पाकिस्ताभन को डर सता रहा है कि भारत पीओके पर कब्जा् कर सकता है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्ताकन के गिलगित प्लाान के पीछे पाकिस्ताकनी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा का हाथ है। पाकिस्ता नी मीडिया के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने गिलगित को लेकर पिछले दिनों देश की सभी बड़ी पार्टियों के नेताओं को सेना मुख्यामलय रावलपिंडी में आयोजित दावत में बुलाया था। इसमें नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ, आस‍िफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी समेत पाकिस्ताीनी सियासत के कई दिग्गिज नेता शामिल हुए थे। इस दौरान आईएसआई के प्रमुख भी मौजूद थे।

सेना राजनीतिक मामलों में हस्त क्षेप कर रही: बिलावल
बाजवा ने गिलगित को प्रांत बनाए जाने के मुद्दे पर चर्चा की लेकिन उसी दौरान उनकी बिलावल भुट्टो और शाहबाज शरीफ से बहस हो गई। बाजवा ने कहा कि पीओके पर भारत की कार्रवाई का डर है और चीन इस इलाके में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। ऐसे में हम गिलगित को एक नया प्रांत बनाना चाहते हैं। पाकिस्ताेनी सेना प्रमुख चाहते थे कि गिलगित को प्रांत बनाने के लिए राजनीतिक दल उनका समर्थन करें। इसी दौरान बिलावल ने राजनीतिक मामले में सेना के हस्तरक्षेप का मुद्दा उठा दिया। बिलावल भुट्टों ने कहा कि इसी तरह के हालात वर्ष 1971 में थे और उस समय भी सेना राजनीतिक मामलों में हस्ताक्षेप कर रही थी।

उधर, नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (PMLN) की उपाध्यक्ष मरयम नवाज ने कहा है कि यह एक सरकारी मुद्दा है और इस पर फैसला संसद में होगा, न कि सेना मुख्यालय। मरयम ने अपनी पार्टी के किसी नेता के इस बैठक में शामिल होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह राजनीतिक मुद्दा है और इसे संसद में सुलझाना चाहिए, न कि सेना के मुख्यालय में। मरयम ने कहा है कि मुख्यालय को राजनीतिक नेताओं को ऐसे मुद्दों पर नहीं बुलाना चाहिए और न ही नेताओं को वहां जाना चाहिए।

भारत ने किया था विरोध
भारत ने मई में पाकिस्तान को दो-टूक कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में गिलगित-बल्टिस्तान समेत पूरा इलाका पाकिस्तान या उसकी न्यायपालिका के पास ऐसे क्षेत्रों में अधिकार नहीं हैं जो उसने जबरन अवैध तरीके से कब्जाए हैं। भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कोई बदलाव करने की कोशिश नहीं करने की चेतावनी दी थी और कहा था कि अवैध कब्जा फौरन छोड़ दे। भारत ने इन इलाकों में चुनाव नहीं कराने की चेतावनी भी दी थी।


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