लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री यहां अपने सरकारी आवास पर बनास डेयरी, गुजरात द्वारा उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के वार्षिक अंतर मूल्य (बोनस) भुगतान के संबंध में आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि राजस्व ग्रामों में दुग्ध समितियों के गठन की कार्रवाई की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 7,293 दुग्ध समितियां कार्यरत हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार राज्य में 08 ग्रीनफील्ड डेयरियों की स्थापना करा रही है। यह ग्रीनफील्ड डेयरियां लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, बरेली, गोरखपुर, फिरोजाबाद, अयोध्या तथा मुरादाबाद में स्थापित की जा रही हैं। साथ ही, झांसी, नोएडा, अलीगढ़ तथा प्रयागराज की 4 पुरानी डेयरियों के उच्चीकरण का कार्य भी कराया जा रहा है। कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने जनपद उन्नाव व हरदोई के 2-2 दुग्ध उत्पादकों को वार्षिक अन्तर मूल्य भुगतान का चेक प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बनास डेयरी को दुग्ध आपूर्ति करने वाले जनपद बिजनौर, वाराणसी, फतेहपुर, जालौन, आगरा तथा कानपुर देहात के 01-01 किसान से संवाद किया। इन किसानों से उन्होंने दूध के उत्पादन, आपूर्ति, दुग्ध मूल्य के भुगतान आदि के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया जाएगा।

योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य में स्थापित किए जा रहे डेयरी संयंत्रों को बनास डेयरी के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संचालित करें। उन्होंने कहा कि बनास डेयरी को दुग्ध उपार्जन एवं प्रसंस्करण के संबंध में वृहद् अनुभव है। यह अनुभव प्रदेश के किसानों के आर्थिक उन्नयन में सहायक साबित होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले चरण में प्रदेश के प्रत्येक मंडल में 1 डेयरी, दूसरे चरण में 2 जनपदों में 1 डेयरी तथा अंतिम चरण में प्रत्येक जनपद में 1 डेयरी की स्थापना के लिए कार्य कर रही है। इससे प्रदेश के युवा आर्थिक रूप से स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दुग्ध सहकारिताओं से जुड़े दुग्ध उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही है। इसके तहत प्रदेश स्तर पर सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाले उत्पादक को 2 लाख रुपये तथा द्वितीय स्थान वाले दुग्ध उत्पादक को 1.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है।


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