ऑक्सीजन की खपत 600 सिलिंडर से छह गुना से बढ़कर 3600 हो गई.

 न्यूज़ रिपोर्ट: ऋषभ तिवारी

कानपुर। ऑक्सीजन की खपत 600 सिलिंडर से छह गुना से बढ़कर 3600 हो गई है। सरकारी अस्पतालों में तो रेट कांट्रेक्ट पर ही आपूर्ति की जा रही है लेकिन निजी अस्पतालों और मार्केट में इसकी कीमतें दोगुनी तक कर दी गई हैं। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग लगातार नजर रखे है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार सप्लायरों की मॉनिटरिंग कर रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलट अस्पताल में सबसे बड़ा कोविड हॉस्पिटल है। यहां मेटरनिटी ङ्क्षवग और न्यूरो साइंस सेंटर को मिलाकर 500 आइसोलेशन बेड हैं, जबकि 150 बेड का आइसीयू है। मई-जून में यहां 15 दिन में 10 हजार लीटर लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) लगती थी। जून के बाद से हर दिन 10 हजार लीटर एलएमओ लग रही है। अस्पताल में बैकअप के लिए सात हजार लीटर क्षमता के 250 और 1500 लीटर क्षमता के 200 ऑक्सीजन सिलिंडर रखे हैं। यहीं से इमरजेंसी और वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों को सिलिंडर दिया जाता है।कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय में लेवल वन कोविड अस्पताल स्थापित है। यहां मार्च, अप्रैल, मई में 40 से 50 बड़े सिलिंडर एक दिन में इस्तेमाल हो रहे थे, जबकि मई के बाद से केस बढऩे पर रोजाना 200 सिलिंडर की खपत हो गई है। यहां आइसोलेशन बेड की संख्या 100 है, जबकि 20 बेड आइसीयू के हैं। सेवन एयरफोर्स हॉस्पिटल में मार्च, अप्रैल के समय 20 से 30 सिलिंडर थी, जबकि मौजूदा समय में 240 से 250 सिलिंडर लग रहे हैं। यहां भी कोविड अस्पताल बनाया गया है।ऑक्सीजन की किल्लत ने किराए के ऑक्सीजन सिलिंडरों के रेट भी मनमाने कर दिए हैं। पहले दो, पांच और 10 लीटर के सिलिंडर अधिकतम 50 रुपये किराए तक मिल जाते थे, लेकिन अब इनके रेट भी 200 से अधिक हो गए हैं। रीफिलिंग की कीमत भी आसमान छूने लगी है। नॄसगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.महेंद्र सरावगी ने बताया कि 7000 लीटर का सिलिंडर पहले 450 रुपये का था लेकिन अब उसकी कीमत 900 रुपये हो गई है। इसमें रीफिलिंग और किराया शामिल है।ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसियों ने सरकारी अस्पतालों से सरकारी रेट में अनुबंध किया है। सात हजार लीटर क्षमता का सिलिंडर 109 और 1500 लीटर क्षमता का सिलिंडर 34 रुपये में मिल रहा है।

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