लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भ्रष्टाचार को लेकर अपनाई जा रही जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत परिवहन विभाग में कई अफसरों पर गाज गिरी है। प्रदेश सरकार की ओर से बुधवार को बताया गया कि राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अशोक कटारिया ने अन्य राज्यों के वाहनों को प्रदेश में गलत तरीके से दर्ज करने के प्रकरण में सीबीआई जांच में पाए तथ्यों की विस्तृत जांच के लिए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के अनुपालन में सहायक सम्भागीय, परिवहन अधिकारी (प्रशासनिक) वाराणसी, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासनिक) औरैया एवं सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासनिक), मऊ को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। दरअसल सीबीआई जबलपुर में केनरा बैंक में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच कर रही है। जांच में पाया गया कि वहां बैंक मैनेजर ने फर्जी दस्तावेजों पर करीब 50 से अधिक लोगों को ट्रक जैसे बड़े वाहनों पर लोन स्वीकृत कर दिया। इनमें से करीब 12 वाहन यूपी में पंजीकृत हुए। इन वाहनों को बनाने वाली कंपनी ने सीबीआई को बताया कि जिन इंजन व चेसिस नंबरों पर यह वाहन पंजीकृत किए गए उन वाहनों को कंपनी ने बनाया ही नहीं है। जांच में तीन एआरटीओ की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इन्होंने वाहनों की जांच किए बगैर इनका पंजीकरण कर दिया। सीबीआई की जांच में दोषी पाए गए अरुण कुमार राय, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) वाराणसी, धर्मवीर यादव सहायक, संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) औरैया व अवधेश कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी मऊ को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। मामले के दौरान इन अधिकारियों की सोनभद्र में तैनाती थी। इसके साथ ही एक अन्य प्रकरण में जनपद झांसी में सरकारी वाहनों के लिए जारी होने वाली बीजी नम्बर की सीरीज को प्राइवेट नम्बर के रूप में जारी करने के लिए विवेक कुमार शुक्ला, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी को मुख्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। वहीं सत्येंद्र कुमार, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासनिक) झांसी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित की गई है।


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