नई दिल्ली। कांग्रेस के राज्यसभा में उपनेता आनंद शर्मा ने बुधवार को कहा कि कोरोना महामारी के मद्देनजर मार्च में अचानक किये गये राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से पूरा देश स्तब्ध रह गया था और इस महामारी ने देश में स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की आवश्यकता बतायी है। श्री शर्मा ने सदन में कोरोना महामारी पर चर्चा की शुरूआत करते हुये कहा कि कोरोना के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व स्थिति के बारे में किसी ने कल्पना नहीं थी। न तो पहले की पीढ़ी ने और न ही वर्तमान पीढ़ी ने इसकी कल्पना की थी। हालांकि सवाल यह है कि इसके लिए हमारी तैयारी कितनी थी। इस महामारी के कारण विकसित देश से लेकर विकासशील देश तक भय का महौल बन गया जो अभी भी बना हुआ है। डॉक्टर और वैज्ञानिक इसको समझ नहीं पाये और इसको समझने में समय लगा है। उन्होंने कहा कि इसके बीच पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गयी जिससे पूरा देश स्तब्ध रह गया। इससे देश को कितना लाभ और कितना नुकसान हुआ इसकी जानकारी सदन को दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की आवश्यकता थी और पूरे विश्व में ऐसा किया गया लेकिन देश में इसके लिए तैयारियां नहीं की गयी। यदि राज्यों के साथ विचार विमर्श कर ऐसा किया जाता और तहसील स्तर पर क्वोरेंटाइन सेंटर बनाये जाते तो गांवों में कोरोना नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि अभी इससे पीड़ितों की संख्या 50 लाख के पार पहुंच गयी है और 82 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह वायरस अमीर और गरीब देश में कोई अंतर नहीं देखता है और इस तरह की महामारी की तैयारी कोई भी नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि देश में कोरोना से निपटने में सरकारी अस्पतालों की स्थिति का खुलासा हुआ है। जहां 70 फीसदी काेरोना पीड़ित भर्ती होते हैं वहां मात्र 30 फीसदी आईसीयू बेड उपलब्ध है जबकि 70 फीसदीी लोगों को आईसीयू बेड के लिय निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ा है। ऐसी स्थिति को देखते हुये सरकारी स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने की जरूरत है। कोरोना महामारी के बहुत कड़वे अनुभव मिले हैं। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने की व्यवस्था की जानी चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की हुयी मौत का आंकड़ा सरकार के पास न होना बहुत दुखद है जबकि इस संबंध में मीडिया में खबरें आयी हैं। रेलवे स्टेशन पर बच्चा को अपनी मृत मां का चादर उठाते तस्वीर छपी है। इसके मद्देनजर सरकार को प्रवासी मजदूरों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति में उनकी निगरानी की जा सके।


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