नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच आज से शुरू हुआ संसद का मानसून सत्र हंगामेदार रहा। एक ओर जहां विपक्ष ने अर्थव्यवस्था, कोविड-19 संकट और चीन से विवाद को लेकर सरकार से सवाल किए, वहीं प्रश्नकाल हटाने को लेकर सांसदों ने लोकतंत्र की दुहाई देते हुए आरोप भी लगाए। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रश्नकाल हटाये जाने को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल को हटाने को लेकर दिए गए कारण समझ से परे हैं। उन्होंने यह भी कहा विपक्ष का सवाल करना लोकतंत्र का सार है। ऐसे जब सदन की कार्यवाही चल रही है तो कोई मुद्दा नहीं है कि केवल प्रश्नकाल से ही समस्या हो। वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने प्रश्नकाल को विपक्ष का अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि यह सरकार को जवाबदेह ठहराता है। इसे रद्द करके भारत सरकार ने संसदीय लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार किया है। इस दौरान उन्होंने कौल और शेखर-पृष्ठ 473 (अभ्यास और प्रक्रिया) का हवाला देते हुए इसके उन्मूलन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल पर आखिरी निर्णय का अधिकार अध्यक्ष महोदय के पास है लेकिन निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए था। जबकि यहां तो विपक्ष से चर्चा तक नहीं कि गयी। इससे इतर, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर संसद के मानसून सत्र में प्रश्नकाल नहीं होने को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा, “अगर 18 दिनों के मानसून सत्र में 45 विधेयक और 2 वित्तीय विषय पेश हो सकते हैं तो फिर प्रश्नोत्तर काल क्यों नहीं? उन्होंने सवाल किया कि क्या यह संसदीय प्रणाली को धूमिल करने और जनता के प्रति जबाबदेही से भागने का तरीक़ा है? उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी को देखते हुए संसद सत्र की अवधि घटाई गयी है। ऐसे में सांसदों की सुरक्षा और समय को लेकर पूरे सत्र के लिए प्रश्नकाल को हटा दिया गया है। हालांकि शून्यकाल की कार्यवाही होगी। वहीं दिन की पहली पाली से राज्यसभा और दूसरी पाली में लोकसभा सदन चलने की व्यवस्था है।


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