घाघरा फिर खतरे के निशान से पार

गोण्डा। घाघरा ने एक बार फिर से तूफानी रुख अख्तियार कर लिया है। जिससे बाढ़ पीडि़तों में हलचल तेज हो गई है। बुधवार सुबह घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करता हुआ 106 दशमलव 276 पर पहुंच चुका है, जो खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर है। अनुमान लगाया जा रहा है कि गुरुवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 60 सेंटीमीटर से भी ऊपर होगा। ऐसे में बांध के हालात को देखते हुए अब खतरा और बढ़ चुका है। गिरजा, शारदा व सरयू बैराजो का कुल डिस्चार्ज 3 लाख 27 हजार 430 क्यूसेक पहुंच चुका है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने बांध पर रह रहे बाढ़ पीडि़तों से मुलाकात कर उनका दुख-दर्द जाना। नकहारा व मंझरायपुर के बाढ़ पीडि़तों ने बताया कि बांध गांव के बाहर से बना दिए जाने से उनका गांव बाढ़ व नदी के जद में आ चुका है। जिससे गांव का अस्तित्त्व खतरे में है। नदी में उफान आते ही गांव का डूबना तय माना जा रहा है। यही हाल मांझा रायपुर का भी है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते सही तरीके से परियोजनाओं को बनाने व संचालित करने का काम नहीं किया। जिससे इतना पैसा खर्चा होने के बाद भी बाढ़ पीडि़तों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। वही बांध पर तमाम रेट होल शाही होल सहित रेन कट हो चुके है। जिससे बांध जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। नदी में उफान आते ही बांध पर खतरा आना तय माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नदी का दबाव बांसगांव के पास व सकरौर भिखारीपुर रिंग बांध पर बताया जा रहा है।

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