लखनऊ। तुलसी जयंती पर अयोध्या शोध संस्थान और बंगाल रामायण शोध समूह की ओर से अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में “आसियान कला, संस्कृति और आध्यात्मिकता के माध्यम से रामायण का ज्ञान” विषय पर वक्ताओं ने कहा कि जापान में आज भी हिन्दू देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है वहीं इंडोनेशिया और फिलीपींस में रामायण का गहरा प्रभाव दिखता है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ.योगेंद्र प्रताप सिंह की परिकल्पना और जगमोहन रावत के तकनीकी निर्देशन में हुए इस वेबिनार में ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया रामायण प्रोजेक्ट की संयोजिका अनीता बोस की वैदिक वंदना के बाद मुख्य अतिथि के रूप मे आमंत्रित विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अखिलेश मिश्रा ने कहा कि तुलसीदास की रचनात्मक प्रतिभा ने राम की कहानी और संदेश को आम लोगों के लिए सुलभ बना दिया। उनके अनुसार राम का संदेश सार्वभौमिक है, जो भाषा और धार्मिक विश्वास, भूगोल, समय और स्थान की सीमाओं से परे है। विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यटन और संस्कृति जितेंद्र कुमार ने कहा कि यह विश्वकोश परियोजना कई देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक पुल का महती कार्य करेगी। कला इतिहासकार और प्रसिद्ध फोटोग्राफर बेनोय के.बहल द्वारा 10 एशियाई देशों पर रामायण के प्रभाव पर आधारित शोधपरक लघु वृत्तचित्र इस वेबिनार का मुख्य आकर्षण बना। उनके वृत्तचित्र में दर्शाया गया कि ब्रह्मा से लेकर सरस्वती तक विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं की पूजा जापान में की जा रही है। इंडोनेशिया स्थित गजह मद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.टिम्बुल हरोनो ने कहा कि ष्भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अतीत का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि नवीं शताब्दी में रामायण का प्रसार इंडोनेशिया तक हो गया था। उनके अनुसार रामायण, इंडोनेशियाई वासियों की पहचान है। कल्चरल एंड आर्ट स्टडीज सेंटर फिलीपींस के संस्थापक-निदेशक डॉ.स्टीवन फर्नांडीज ने फिलीपींस की संस्कृति में रामायण के व्यापक प्रभाव की विस्तार से चर्चा की।


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home/newswebp/theblat.in/wp-includes/functions.php on line 4673