कोरोना के मरीजों जैसा व्यवहार कर रहे है निजी स्कूल आरटीई छात्रों से
लखनऊ। सरकारी विद्यालयों की स्थिति और दुर्दशा देखते हुये गरीब से गरीब व्यक्ति अपनी हैसियत के अनुसार अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा ही देना चाहता हे। शिक्षा के अधिकार के अधिनियम के तहत वह अच्चे से अच्छे किसी भी विद्यालय में अपने बच्चों को प्रवेश दिला सकता है। परन्तु विभिन्न नियमों को हवाला देते हुये निजी विद्यालय इसमें अड़ंगा डाल रहे है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का निजी विद्यालय मखौल उड़ा रहे है। शिक्षा विभाग द्वारा जारी लिस्ट में बच्चे का नाम आने के बाद जब अभिभावक प्रवेश के लिये निजी स्कूलों में जाता है तो उसके साथ कोरोना के मरीज जैसा व्यवहार किया जाता है। उसे किसी न किसी बहाने से भगाने का प्रयास किया जाता है। प्रवेश के लिये आवेदक के जाने पर सबसे पहले यही बहाना होता है कि अभी विभाग से लिस्ट नहीं आयी है। आते ही हम खुद सूचना देगें। दूसरा बहाना जिस वार्ड में स्कूल है आपका घर उसी वार्ड में नहीं है अत: प्रवेश नहीं लिया जा सकता है।

तीसरा बहाना आपके घर से विद्यालय की दूरी एक किलोमीटर से अधिक है। किसी दूसरे पास के स्कूल में प्रवेश के लिये जायें। चौथा बहाना है कि आपके बताये घर के पास फलां सरकारी स्कूल है अत: प्रवेश नहीं लिया जा सकता है। इस प्रकार बहाने पर बहाने बना कर गरीब आरटीई आवेदक का हौसला की पस्त कर दिया जाता है। शिक्षा के अधिकार के प्रवेश दिलवाने में विभाग की लापरवाहियां भी आरटीई आवेदकों के लिये परेशानी का सबब बन रही है। जो विद्यालय वर्तमान मे संचालन में नहीं है उनके भी नाम आवेदक को दे दिये जातेे है। जिससे वह बिना वजह परेशान होता है। विभाग के अधिकारी प्रवेश की लिस्ट लेकर निजी विद्यालयों में तो जा रहे है परन्तु आवेदक का प्रवेश नहीं करवा पा रहे है। इन अधिकारियों को भी स्कूल वाले कोई न कोई गणित समझा देते है। राजधानी के अनेक प्रतिष्ठित नामचीन स्कूल आरटीई के प्रवेश लेने से सीधे-सीधें मना कर चुके है। जो सीधें जिला विद्यालय निरीक्षक को एक चुनौती है। साथ ही शिक्षा के अधिकार के अधिनियम का खुला उल्लघंन है। जिला प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा ंहै। कई विद्यालय आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों से बाकायदा फीस के साथ कापी-किताब ड्रेस आदि का पैसा भी लेते है। दलील यह कि आपको तो सरकार से रूपया मिल ही रहा है। साथ ही उसके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार भी करते है। जो किसी भी बच्चे के मानसिक विकास के लिये ठीक नहीं है।


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