अंकित शुक्ला
संपूर्ण विश्व में सकारात्मक सोच के आश्चर्यजनक व चमत्कारिक एवं मानव जीवन पर पडऩे वाले इस के रहस्यमई असर को एक सुर में सभी ने स्वीकारा है। तथा अनेकों बार वैज्ञानिक परीक्षण कर यह सिद्ध किया जा चुका है। कि सकारात्मक सोच का सीधा असर हमारे मन मस्तिष्क पर पड़ता है। जिसके परिणाम स्वरूप हमारे भीतर सुख सुरक्षा एवं आनंद के भाव जागृत करने वाले जैविक रसायन उत्पन्न कर हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली को बेहतर कर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है। जिसके कारण हम अनेक प्रकार के रुग्णताओं से मुक्त रहते हैं। देश में जब आज वैश्विक कोरोना महामारी अपने विकराल रूप मे मृत्यु रूपी तांडव कर विनाश लीला खेल रही है। जहां एक ओर पूरे देश मे भैय और चिंता का माहौल व्याप्त है। वहीं दूसरी तरफ इस प्राण घातक महामारी से बचाव का कोई मार्ग नहीं दिख रहा है।

तथा न ही अभी तक इस महामारी की कोई खास एंव असरदार दवा ही सामने आई है।जब तक इस खतरनाक वायरस से बचाव का टीका सभी को न लग जाए तब तक मजबूत इच्छा शक्ति के साथ सकारात्मक नजरियें को बनाए रखना होगा। यही सकारात्मक सोच हमारे लिए मील का पत्थर साबित होगा। हमारे देश की सरकार ने समय रहते जो लॉकडाउन का सकारात्मक निर्णय लिया तथा राज्य सरकारों एंव देश की जनता का जो सहयोग देश की सरकार को मिला उसके कारण कोरोना महामारी के संक्रमण फैलने की गति पर काफी हद तक अंकुश लगा है।आप को ज्ञात होगा कि समय-समय पर देश के प्रधानमंत्री ने अनेक उत्साहवर्धन कार्य करने की अपील देश की जनता से की जिसमें थाली बजाना, ताली बजाना, दिए जलाना तथा मेडिकल स्टाफ सफाई कर्मचारी एवं मित्र पुलिस को करोना योद्धा सम्मान देकर हौसला बढ़ाना यह सभी कार्य हमारे आत्म बल एवं सकारात्मक सोच को बनाए रखने के लिए ही किए गए।

इसके विपरीत दूसरी तरफ यह भी सत्य है कि भले ही देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा फिर हाल अभी संक्रमण से बचा हुआ है। लेकिन मानसिक रूप से महामारी का गंभीर असर पूरे देश की जनता पर पडा है।सभी लोग भय व तनाव पूर्ण अवस्था से गुजर रहे है। जिसका पहला कारण तो लगातार बढता संक्रमण का खतरा तथा दूसरा कारण लोगों की जीविका का है। मानव जीवन अर्थ पर ही निर्भर है । जैसे मानो अर्थ केंद्र मे लगी वह कील है जिस पर मानव जीवन की चक्की घूमती रहती है। इसके साथ ही लोग खुद को अकेला और असहाय महसूस कर रहे हैं सभी का एक दूसरे से मिलना जुलना बंद हो गया है। तथा भय चिंता एवं अकेलापन लोगों को गंभीर रूप से मानसिक रोगी बना रहा है। ऐसी दशा में लोगों के अंदर अवसाद बढऩा लाजमी है। देश में आत्महत्याओं का दौर चल पड़ा है।

पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी लोग आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। हाल में ही ऐसी कई घटनाएं देश भर से देखने को मिली है। इसके साथ ही गृह कलह भी इस कदर बढ़ गई है, कि हत्या जैसे मामले सामने आ रहे है। इन घटनाओं से साफ स्पष्ट होता है कि लोग किस प्रकार की मनोदशा से गुजर रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों और हालातों में सभी को सकारात्मक नजरिया अपनाते हुए खुद को और समाज को बचाना है। यही एकमात्र विकल्प हमारे पास है। सरकार भी समय व परिस्थितियों को देखते हुए सकारात्मक कदम उठा रही है। लेकिन इसके साथ ही हम सभी को मन मस्तिक से मजबूत बनना पड़ेगा। हमारे देश के प्रधानमंत्री देश की जनता से आत्मनिर्भर बनने के लिए बार-बार कह रहे हैं। यही सकारात्मक सोच ही आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर वैश्विक कोरोना महामारी की लड़ाई में रामबाण सिद्ध होगी।


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