बांदा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण खत्म हो गया। आय अर्जन हेतु जैविक कीटनाशकों का उत्पादन विषय पर आयोजित प्रशिक्षण में कई प्रवासी मजदूरों ने भी प्रतिभाग किया। सभी प्रशिक्षार्थियों को प्रमाणपत्र बांटे गए। प्रशिक्षण की अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक (प्रशासन एवं अनुश्रवण) डा.बीके सिंह ने की। उन्होंने श्रमिकों को फसल सुरक्षा के लिए जैविक विधियां बताईं। फल मक्खी ट्रैप, वाटर ट्रैप, फैरोमेन ट्रैप, पीलाध्सफेद मैजिक कार्ड, जीवामृत, नीम का तेल आदि के उपयोग और फसल में लगने वाले रोग व कीटों के प्रबंधन पर जोर दिया। डा. राकेश पांडेय ने ट्राइकोडर्मा मित्र फफूंदी से वर्मी कंपोस्ट बनाने की विधियां बताईं। डा.एचएस नेगी ने कृषकों की आय बढ़ाने में जैविक खेती की भूमिका पर चर्चा की। डा. अनिकेत कोल्हापुरे ने मानव जीवन में जैविक खेती का महत्व बताया। डा.कमालुद्दीन ने श्रमिकों को प्रशिक्षित किया। कार्यक्रम समन्वयक डा.मंजुल पांडेय ने अंतिम दिन तीन दिवसीय प्रशिक्षण की आख्या प्रस्तुत की। प्रवासी मजदूर यदुनाथ गुप्ता, शिवकांत शुक्ला और संजय ने अपने अनुभव साझा किए। कृषि विज्ञान केंद्र अध्यक्ष डा.श्याम सिंह ने प्रशिक्षार्थियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार जताया। संचालन डा. सुभाषचंद्र सिंह ने किया। केंद्र के वैज्ञानिक डा.मानवेंद्र सिंह, डा.दीक्षा पटेल, घनश्याम यादव प्रशिक्षण में सहयोगी रहे।


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