केवट प्रसंग और भरत मिलाप का हुआ मंचन

द ब्लाट न्यूज़ टीएचए में शुक्रवार को रामलीला में राम केवट संवाद, दशरथ मरण, भरत मिलाप लीला का मंचन हुआ। रामलीला का मंचन देख दर्शक भावुक हो उठे। देर रात राम नाम के उद्घोष के साथ शुक्रवार की लीला का समापन किया गया।

 

 

 

 

वसुंधरा सेक्टर-एक की रामलीला मैदान में श्री हरि रामलीला ट्रस्ट, वसुंधरा सेक्टर-सात के संकट मोचन रामलीला, लाजपत नगर, वैशाली की रामलीला में रामलीला के राम केवट संवाद, दशरथ मरण, भरत मिलाप लीला का मंचन किया गया। लीला में राम वनवास के बाद सुमंत भटकते-भटकते अयोध्या पहुंचते हैं। उनके पहुंचने के बाद महाराज दशरथ का स्वर्गवास हो जाता है। यह देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। ननिहाल से लौटे भरत को पता चलता है कि पिता जी का स्वर्गवास हो गया है और बड़े भाई राम को वनवास हो चुका है, तो उन्हें बहुत दुख होता है। वह अपनी माता कैकई को बहुत कोसते हैं। पिता की अंतिम क्रिया कर्म के बाद भरत अपने भाई श्रीराम से मिलने के लिए वन में जाते हैं। भगवान श्रीराम को पिता की मौत की खबर सुनते ही आंखों से आसुंओं की धारा बहने लगती है। सभी रामलीलाओं में शुक्रवार को देर रात तक भीड़ उमड़ी रही। वहीं, इंदिरापुरम की धरोहर रामलीला में अंकिता भंडारी के लिए सभी दर्शकों और कार्यकारिणी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रखा और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। साथ ही अंकिता को न्याय दिलाने की मांग की। उसके बाद लीला शुरू की गई।

 

 

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