फैजाबाद से मुंबई जा रही साकेत एक्सप्रेस में संरक्षित प्रजाति के 140 कछुए बरामद

अन्तरराष्ट्रीय बाजार में लाखों में कीमत

चित्रकूट । फैजाबाद से मुम्बई की ओर जाने वाली साकेत एक्सप्रेस ट्रेन से संरक्षित प्रजाति के कुछए बरामद हुए हैं। इन कछुओं को तस्करी कर ले जाया जा रहा था। जिसे जीआरपी, आरपीएफ और वाइल्ड लाइफ की संयुक्त टीम ने छापेमारी के दौरान बरामद किया है।

रविवार देर रात जीआरपी और आरपीएफ पुलिस के साथ वाइल्ड लाइफ की टीम ने चित्रकूट जनपद के मानिकपुर रेलवे जंक्शन स्टेशन पर संरक्षित प्रजाति के कछुओं को बरामद किया है। बताया जा रहा है कि साकेत एक्सप्रेस ट्रेन में जीआरपी और आरपीएफ पुलिस के साथ वाइल्डलाइफ की टीम की छापेमारी की। इस दौरान ट्रेन के अंदर संदिग्ध अवस्था में रखे एक बैग से संरक्षित प्रजाति के 140 कछुए बरामद किए गए। तस्करी कर ले जाए जा रहे इन कछुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये बताई जा रही है। फिलहाल इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

चित्रकूट के मानिकपुर रेलवे जंक्शन स्टेशन पर फैजाबाद से मुम्बई की ओर जाने वाली साकेत एक्सप्रेस ट्रेन में तस्करी के लिए विलुप्त प्रजाति के संरक्षित कछुओं की खेप ले जाने की सूचना जीआरपी के हेड कॉन्स्टेबल परवेज अहमद को मिली। जिसके बाद उसने उच्च अधिकारियों से बात की। इसके बाद उच्चअधिकारियों ने वाइल्ड लाइफ टीम और आरपीएफ के सहयोग से मानिकपुर पहुंचने पर साकेत एक्सप्रेस की तलाशी ली। इस दौरान ट्रेन के डी-2 कोच के बर्थ नंबर 51 के नीचे संदिग्ध अवस्था में बैग मिला। जिसमें कुछ हिलता डुलता नजर आया। बर्थ नंबर 51 के आस-पास बैठे यात्रियों ने भी इसकी सूचना पुलिस को दी थी।

इस मामले में वाइल्ड लाइफ के रेंजर त्रिभुवन सिंह ने बताया कि बरामद कछुए रत्ताइल प्रजाति के हैं। जो मूलतः असम और बांग्लादेश और ब्रह्मपुत्र नदी के मीठे पानी में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि रत्ताइल की प्रजाति के कछुए अब विलुप्त के कगार पर हैं। उन्होंने बताया कि, इस प्रजाति के कछुए 140 वर्ष की उम्र तक जीवित रह सकते हैं और इनकी लंबाई 20 सेंटीमीटर तक होती है। इस प्रजाति के जनवरी से मार्च के बीच में अंडे देते हैं। मीठे पानी के रहने वाले इस कछुए को असम रूफ टर्टल के नाम से भी जाना जाता है और इनका वैज्ञानिक नाम पंगशुरा सिल्हेटेंसिस है।

वहीं जीआरपी थाने के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार सरोज ने बताया कि वाइल्ड लाइफ टीम और आरपीएफ के सहयोग से हुई कार्रवाई में बैग की जब जांच की गई तो उसमें जीवित कछुए मिले। जिसकी गिनती करने के बाद कुल 140 से कछुए थे। जिन्हें आगे की कार्रवाई के लिए वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के रेंजर त्रिभुवन सिंह को सौंप दिया गया है। रेंजर के अनुसार संरक्षित कछुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों में है।

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