ट्रिप्स छूट को लेकर अन्य देशों के साथ काम कर रहा है भारत : श्रृंगला

नई दिल्ली । विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक व्यवस्था प्रभावित हुई है और भारत, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में कई अन्य देशों के साथ व्यापार संबंधित पहलुओं पर बौद्धिक संपदा अधिकार (ट्रिप्स) को लेकर लक्षित और अस्थायी छूट के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का उद्देश्य सभी को समय पर और सुरक्षित टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोविड-19 पर ‘दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय स्वास्थ्य सहयोगी’ मंच की बैठक को संबोधित करते हुए विदेश सचिव ने कहा कि कोविड-19 महामारी दूसरे वर्ष में प्रवेश कर गयी है और भारत कोरोना वायरस की बेहद गंभीर दूसरी लहर से मुकाबला कर रहा है। श्रृंगला ने कहा, ‘‘हमने काफी तनावपूर्ण स्थितियों को देखा है। हम अभूतपूर्व आर्थिक एवं सामाजिक बाधाओं एवं परेशानियों से मुकाबला कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रकार की चुनौतियों के लिए बहुस्तरीय प्रतिक्रिया की जरूरत होती है। राष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए न केवल एक सम्पूर्ण सरकार की बल्कि पूरे समाज के एकजुट पहल की जरूरत होती है। इसके लिए वैश्विक आधार पर समाधान एवं क्षमता तैयार करने की जरूरत होती है।’’ श्रृंगला ने कहा, ‘‘भारत विश्व व्यापार संगठन में कई अन्य देशों के साथ व्यापार संबंधित पहलुओं पर बौद्धिक संपदा अधिकार (ट्रिप्स) को लेकर लक्षित और अस्थायी छूट के लिए काम कर रहा है ताकि सभी को समय पर और सुरक्षित टीके की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘’हम भारत में स्वदेशी निर्मित भारत बायोटेक के टीके की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से मंजूरी को लेकर आशान्वित हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस महामारी से निपटने को लेकर वैश्विक स्तर पर कार्यरत विभिन्न घटकों में विश्व स्वास्थ्य संगठन एक महत्वपूर्ण पक्ष है। विदेश सचिव ने कहा कि सामरिक स्तर पर उन्हें इसके कारण सम्पूर्ण वैश्विक व्यवस्था के समक्ष उत्पन्न अनिश्चितताओं के बारे में पता है। इसके कारण भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक आचार प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके कारण विश्वास एवं पारदर्शिता प्रभावित हुई है तथा इसके कारण वैश्विकरण में भरोसा प्रभावित हुआ है। श्रृंगला ने कहा कि जिसे अक्सर ‘वैश्विक व्यवस्था’ कहा जाता है, उसको लेकर देखा गया है कि वह महामारी की चुनौतियों से निपटने में अपर्याप्त रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस अप्रत्याशित घटना से निपटने के लिए रातोंरात नई क्षमताएं सृजित करनी पड़ी। हमें नवाचार करना पड़ा, नये सिरे से उद्देश्य तय करना पड़ा, पुनर्रचना करनी पड़ी और महामारी कूटनीति को लेकर पूरी तरह से नई व्यवस्था बनानी पड़ी।’’ विदेश सचिव ने कहा कि महामारी के दौरान भारत ने दुनिया भर में आवश्यक दवाओं, कच्चे माल, चिकित्सा उपकरणों संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान की और उनसे सम्पर्क साधा। उन्होंने कहा, ‘‘हम वेंटीलेटर के पुर्जो, आरएनए किट, रोचे कोबास जांच मशीन जैसे उपकरणों के संबंध में अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमता को बेहतर बनाने के लिये चिकित्सा उत्पादों, मशीनरी एवं उनके पुर्जो को लाने के प्रयास में शामिल रहे।’’ श्रृंगला ने कहा कि वायरस की दूसरे लहर के दौरान तात्कालिक रूप से जरूरी चिकित्सा आपूर्ति की खरीद के प्रयासों को पुन: सक्रिय किया गया। उन्होंने कहा कि भारत चिकित्सा ऑक्सीजन, क्रायोजेनिक आईएसओ टैंकर, जियोलाइट, रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, एम्फोटेरिसिन-बी जैसी आवश्यक दवाओं को मंगाने के वैश्विक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इन्हें विभिन्न स्रोतों से और अनेक देशों से भारत मंगाया गया। विदेश सचिव ने कहा, ‘‘हम फाइजर, जॉनसन एंड जॉनसन, माडर्ना जैसी टीका विनिर्माता कंपनियों से टीका मंगाने और भारत में स्थानीय स्तर पर संभावित उत्पादन के बारे में चर्चा में शामिल रहे। हमने रूसी स्पूतनिक-वी टीका मंगाने में शीघ्रता दिखायी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘महामारी के दौरान डिजिटल कूटनीति में हमने अपने आप को तेजी से ढाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल माध्यम से 12 शिखर बैठक की और 75 द्विपक्षीय संवाद किये। विदेश मंत्रालय ने भी विभिन्न स्तरों पर काफी संख्या में बैठक की।’’

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