एक सीट का भी आरक्षण बदला तो छह सीटों पर पड़ेगा असर

पंचायत चुनाव की आरक्षण प्रक्रिया को लागू करने के कोर्ट के आदेश के बाद उन तमाम लोगों के चेहरे पर रौनक लौट आई जो इस बार हुए आरक्षण की वजह से चुनाव नहीं लड़ सकते थे। गांवों में फिर से नये समीकरण बनाए जाने लगे। आरक्षण व्यवस्था बदलने मात्र की खबर से ही संभावित प्रत्याशी भी बदले जाने लगे हैं।

पंचायतराज विभाग में भी गुणा गणित का दौर शुरू हो गया है। अगर एक सीट का आरक्षण बदलेगा तो उसका असर छह सीटों पर पड़ता है। इस तरह से देखा जाए तो प्रधान पदों पर शाहजहांपुर जिले में 400 आपत्तियां थीं, इस तरह से बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदलेगा। इसी तरह से बीडीसी, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत के वार्डों के आरक्षण पर भी खासा बदलाव देखने को मिल सकता है। अभी जब आरक्षण जारी किया गया तो गांवों में दावतों का दौर शुरू हो गया था, लेकिन कोर्ट ने जैसे ही आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाई तो प्रत्याशियों के घरों में जल रहे चूल्हों की आंच कम हो गई थी। अनिश्चितता का माहौल हो गया था। पर अब सोमवार को जब कोर्ट ने कहा कि 2015 के हिसाब से ही आरक्षण लागू किया जाए तो नये संभावित प्रत्याशियों की बांछें खिल गईं। इस दौरान लोगों ने गांव में चौपालों पर भीड़ लगानी शुरू कर दी।

एक-दूसरे से फोन पर संपर्क कर आगे की संभावनाओं पर लोग चर्चा करने लगे। कोर्ट के आदेश के अनुसार अगर आरक्षण लागू होता है तो सबसे ज्यादा फायदा सामान्य वर्ग के लोगों को होगा, क्योंकि सबसे ज्यादा परेशानी में भी सामान्य वर्ग के ही लोग आ गए थे। शाहजहांपुर में आरक्षण को लेकर सबसे ज्यादा आपत्तियां भी सामान्य वर्ग के लोगों ने दाखिल की थीं।

किसी के चूर तो किसी के साकार होंगे प्रधान बनने के सपने
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों पर आरक्षण को लेकर अंतिम प्रकाशन की तारीख से एक दिन पहले ही एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब सोमवार को हाईकोर्ट ने कहा कि 2015 को आधार मानते हुए सीटों पर आरक्षण लागू किया जाए। इसके पूर्व राज्य सरकार ने कहा कि वह वर्ष 2015 को आधार मानकर आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए तैयार है। साथ ही 25 मई तक पंचायत चुनाव संपन्न कराने के आदेश दिया गया है। इस व्यवस्था के तहत हजारों लोग ऐसे थे, जिन्हें फायदा होगा। पूर्व में जारी आरक्षण के आधार पर अब तमाम लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो रहे थे, वह अब फिर से अपनी किस्मत को आजमा सकते हैं। लागू होने वाले आरक्षण के कारण अब बहुतों को मायूसी होगी तो वहीं बहुतों की किस्मत चमकेगी।

अधिकारी-कर्मचारियों में चलता रहा मंथन
सोमवार को जनहित याचिका पर आये हाईकोर्ट के आदेश को लेकर सोमवार को डीपीआरओ दफ्तर में अधिकारियों और कर्मचारियों में मंथन चलता रहा, क्योंकि अब फिर से आरक्षण प्रक्रिया को लेकर अफसरों और कर्मचारियों को खाका तैयार करने के लिए जुटना होगा। डीपीआरओ पवन कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश को लेकर अभी तक कोई शासनादेश प्राप्त नहीं हुआ है। शासनादेश आने के बाद ही कार्यालय में पंचायत चुनाव को लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी

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